लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। कुल 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 11 सीटें आंकड़ों के लिहाज से बेशक नगण्य हों, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि इन्हें नजरअंदाज करना किसी दल के लिए मुमकिन नहीं है। 2017 के चुनावी समर में इन 11 में से नौ सीटों पर काबिज हुई भाजपा उपचुनाव में एक सीट की फिसलन से भी सजग है। तय है कि उपचुनाव के परिणाम भी विपक्षी योगी सरकार के ढाई साल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बड़े फैसलों की समीक्षा के सांचे में ढालेंगे। वहीं, भाजपा की प्रचंड आंधी में ढेर हुई सपा, बसपा और कांग्रेस के लिए तो एक-एक सीट पर जीत 'बैसाखी' से कम नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर घोषित हुए उपचुनाव को राजनीतिक पंडित 2022 के आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान कर चल रहे हैं। इन 11 सीटों में से कांग्रेस पिछले चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। अब उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने में कांग्रेस काफी आगे रही है। 10 सीटों पर पार्टी प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बसपा ने सभी पत्ते खोल दिए हैं तो सपा ने कुछ योद्धा मैदान में उतारे हैं। वहीं, भाजपा प्रत्याशियों पर सबसे अधिक मंथन कर रही है।

दरअसल, सबसे बड़ी चुनौती सत्ताधारी भाजपा के सामने ही है। वजह यह कि अभी प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे हुए हैं। सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाई हैं, जबकि विपक्षी कानून व्यवस्था, बिजली संकट जैसे मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार के फैसलों पर भी इन चुनाव परिणामों के जरिये मुहर आंकी जाएगी। भाजपा के प्रचारक मंच से जहां स्थानीय मुद्दों के साथ अनुच्छेद 370 और तीन तलाक का जिक्र कर सीना ठोंक कर रहे हैं तो विरोधी खेमा भी इनके साथ ही आर्थिक मंदी को मुद्दा बनाने में जुटा है। ऐसे में एक सीट का भी नुकसान भाजपा की साख पर चोट करेगा। वहीं, सपा, बसपा और कांग्रेस जितना हासिल कर लेंगी, वही उनके लिए आगे के सियासी सफर का हौसला होगा।

11 जिलों में आदर्श आचार संहिता

उपचुनावों पर भी नजर रखते हुए जिलों में सरकारी कार्यक्रमों पर जोर दे रही सरकार के राजनीतिक प्रयासों का शनिवार को वक्त पूरा हो गया है। प्रदेश के जिन 11 जिलों में 21 अक्टूबर को मतदान होना है, उनमें आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि आदर्श आचार संहिता सहारनपुर, रामपुर, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, बहराइच व मऊ में तत्काल प्रभाव से लगा दी गई है। इसके साथ ही अब सरकार इन जिलों के लिए कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकेगी। किसी भी तरह के ट्रांसफर-पोस्टिंग भी अब नहीं हो सकेंगे। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही इन जिलों में शनिवार शाम से ही राजनीतिक दलों के होर्डिंग भी हटने शुरू हो गए।

लगभग बिछ चुकी है उपचुनाव की बिसात

1.लखनऊ कैंट

प्रयागराज संसदीय सीट से प्रो. रीता बहुगुणा जोशी के चुनाव जीतने के बाद लखनऊ कैंट विधानसभा की सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर होने वाले उप चुनाव में कांग्रेस ने दिलप्रीत सिंह और बसपा ने अरुण द्विवेदी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा और सपा ने अभी उम्मीदवारों को घोषणा नहीं की है। भाजपा में तो टिकट पाने वालों की लंबी लाइन हैं तो समाजवादी पार्टी भी किसी बाहरी चेहरे को उतारने की तैयारी में है।

2.रामपुर

रामपुर सदर की जिस सीट से सपा के कद्दावर नेता आजम खां नौ बार विधायक रहे हैं, वहां उपचुनाव होना है। मुकदमों से लगातार सुर्खियों में छाए सांसद आजम की वजह से इस सीट पर सभी की निगाहें हैं। अभी सपा और भाजपा ने प्रत्याशी तय नहीं किए हैं, जबकि कांग्रेस ने अरशद अली खां गुड्डू और बसपा ने जुबैर मसूद खां को टिकट दिया है।

3.जलालपुर

2017 में बसपा से रितेश पांडेय विधानसभा जलालपुर के विधायक बने थे। इसके बाद पार्टी ने रितेश पांडेय को अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए। उपचुनाव में बसपा ने विधान मंडल दल के नेता लालजी वर्मा की पुत्री डॉ. छाया वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने सुनील मिश्र पर दांव लगाया है। भाजपा और सपा ने अभी तक अपने प्रत्याशियों को घोषणा नहीं की है।

4.जैदपुर

बाराबंकी के जैदपुर से भाजपा विधायक रहे उपेंद्र सिंह रावत के बाराबंकी सांसद चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई है। उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने तनुज पुनिया को प्रत्याशी बनाया है, जो कांग्रेस नेता राज्यसभा सदस्य डॉ. पीएल पुनिया के पुत्र हैं। बसपा ने लखनऊ जोन के प्रभारी अखिलेश आंबेडकर को टिकट दिया है। भाजपा और सपा में मंथन चल रहा है।

5.गोविंदनगर

कानपुर के गोविंदनगर से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री रहे सत्यदेव पचौरी के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। उपचुनाव के लिए बसपा ने कांग्रेस छोड़कर आए देवी प्रसाद तिवारी और कांग्रेस ने करिश्मा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा में दावेदारों की लंबी कतार पर संगठन की नजर है। वहीं, सपा और प्रसपा भी फैसला नहीं ले सकी हैं।

6.मानिकपुर

चित्रकूट में विधायक आरके सिंह पटेल के सांसद बनने के बाद मानिकपुर विधानसभा सीट रिक्त है। उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने रंजना पांडेय और बसपा राजकरण कोल को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। अब लोगों की निगाहें भाजपा और सपा प्रत्याशियों के नाम पर है।

7.प्रतापगढ़ सदर

जिले की सदर विधानसभा सीट से अपना दल (एस) के संगम लाल निर्वाचित हुए थे। लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा से टिकट मिला और वह संसद पहुंच गए। रिक्त हुई इस सीट पर कांग्रेस ने डॉ. नीरज तिवारी तो बसपा ने रणजीत सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, भाजपा की सहयोगी रहीं अनुप्रिया पटेल की अगुवाई वाले अपना दल (एस) की दावेदारी से भाजपाइयों के सामने असमंजस है। अभी इनमें से किसी ने निर्णय नहीं किया।

8.गंगोह

सहारनपुर की गंगोह विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए प्रदीप चौधरी लोकसभा चुनाव भी जीत गए। खाली सीट पर भाजपा ने अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। सपा ने चौ. इंद्रसेन, बसपा ने चौ. इरशाद और कांग्रेस ने काजी नोमान मसूद को प्रत्याशी बनाया है।

9.इगलास

अलीगढ़ की इगलास विधानसभा से विधायक बने राजवीर सिंह दिलेर अब हाथरस से भाजपा सांसद हैं। कांग्रेस ने उमेश दिवाकर और बसपा ने अभय कुमार बंटी पर दांव लगाया है, जबकि भाजपा, रालोद और सपा समीकरण समझने में लगी हैं।

10.घोसी

मऊ की घोसी विधानसभा सीट से 2017 में जीते फागू सिंह चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। उसके बाद खाली सीट पर उपचुनाव हो रहा है। बसपा ने कयूम अंसारी और कांग्रेस ने राजमंगल यादव पर भरोसा जताया है। भाजपा, सपा सहित अन्य दलों ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

11.बलहा

बहराइच की बलहा सीट के विधायक अक्षयवर लाल गोंड को ही भाजपा ने लोकसभा चुनाव में उतारा और वह जीत गए। बसपा ने रमेश गौतम और सपा ने किरन भारती को उपचुनाव के मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी पर अभी तक फैसला नहीं कर सकी हैं।

Posted By: Umesh Tiwari

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