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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सपा घमासान में जया बच्चन की सांकेतिक एंट्री, कहा-बुड्ढ़े कहां देख पाते सपने

By Nawal MishraEdited By:
Published: Tue, 27 Dec 2016 10:08 PM (IST)Updated: Wed, 28 Dec 2016 10:12 PM (IST)

समाजवादियों की रार में जया बच्चन ने आज सांकेतिक इन्ट्री कर ली। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को स्वप्नदृष्टा ठहराते हुए कहा कि बुड्ढ़े सपने कहां देख पाते।

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लखनऊ (जेएनएन)। समाजवादियों की रार में राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने मंगलवार को सांकेतिक इन्ट्री कर ली। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को स्वप्नदृष्टा ठहराते हुए कहा कि बुड्ढ़े सपने कहां देख पाते। उत्तर प्रदेश को युवा जोश, युवा सोंच वाले नेतृत्व जरूरत है। इस जुमले के ढेरों निहितार्थ निकल ही रहे थे कि मुख्यमंत्री ने यह कहकर कि मैं अपनी बात अधूरी छोड़ता हूं कहकर भविष्य के संकल्प की ओर इशारा कर दिया है।

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मौका अदाकारी का हुनर सिखाने वाले संस्थान के शिलान्यास का था, जिसमें ढेरों फिल्मी सितारों के साथ राज्यसभा सदस्य जया बच्चन भी थी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मेजबान की भूमिका में थे। जहां कामयाबी का नया मुकाम हासिल करने लिए परिवार की परम्परागत धारणाएं तोडऩे की बात शुरू हुई तो वह अनजाने ही सही समाजवादी परिवार की रार से जुड़ती चली गई। एफटीआइआइ, पुणे के पूर्व डीन वीरेन्द्र सैनी ने अपने अतीत के पन्ने पलटते हुए कहा कि वह फिल्म की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे थे, तब पिता ने कहा कि सभ्य घरों के बच्चे नचनिया, गवइया बनते हैं क्या? पिता की धारणा तोड़ी और कामयाबी के मंजिल पर पहुंचे।

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भोजपुरी अभिनेता रवि किशन ने भी ऐसी धारणा का जिक्र करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प के चलते ही उन्हें एक मुकाम मिला। प्रयोगधर्मी निर्माता, निर्देशक अनुराग कश्यप ने सिलसिले को बढ़ाया, अब तक बात सिर्फ धारणा तोडऩे थी मगर अदाकारी से राजनीति में आई जया बच्चन ने अखिलेश को स्वप्न धरातल पर उतारने वाला ठहराते हुए कहा कि 'बुड्ढे सपने का कहां देखते हैं'? वह हर शाम दुआ करती हैं कि प्रदेश को युवा जोश-युवा सोंच वाला नेतृत्व मिले, तब पहली बार इसमें सियासी दांव झलका। वह रूकी नहीं, बल्कि 'जय, जय, जय, जय अखिलेश' का उदघोष कर रहे युवकों से मुखातिब होकर कहा-'आपकी वजह से यह हिम्मत दिखा पाते हैं'। चुनाव के लिए ऊर्जा बचा कर रखें। अब साफ था कि जुमले की पीछे सियासी वार भी और मुख्यमंत्री के पाले में खड़े होने का संकेत बी है।

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जगजाहिर है कि राज्यसभा सदस्य अमर सिंह से जया का छत्तीस का आंकड़ा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अंकल के बाद अब उन्हें बाहरी कहते हैं। बात रुकी नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बोलने खड़े हुए तो कहा कुछ लोग धारणा तोडऩे की बात की है। सोंच रहा था कि मैं इस पर कुछ बोलूं न या न बोलू। यहां मौजूद समाजवादी साथी व पत्रकार समझ रहे हैं। ऐसे में 'अपनी बात आधी-अधूरी छोड़ता हूं'। इस जुमले में परिवार की परंपरागत धारणा तोडऩे का संकल्प तो था ही, यह संकेत भी था संघर्ष के रास्ते से कामयाबी हासिल करने को वह तैयार हैं।

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