लखनऊ, जेएनएन। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच एकड़ जमीन देने के फैसले के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड इसमें कानूनी राय लेने जा रहा है। इस जमीन पर मस्जिद बनाने के साथ ही वेलफेयर के क्या-क्या काम हो सकते हैं, इस पर फैसला कानूनी राय आने के बाद लिया जाएगा। 

सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिलने वाली पांच एकड़ जमीन को लेकर मुस्लिम समुदाय में एक नई बहस छिड़ गई है। एआइएमआइएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सबसे पहले इस मामले को हवा दी। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम समुदाय को खैरात में जमीन नहीं चाहिए। साथ ही उन्होंने कई विवादास्पद टिप्पणियां भी की थीं। इसके बाद गीतकार जावेद अख्तर ने वहां चैरिटेबिल अस्पताल खोलने की बात कही है। पटकथा लेखक सलीम खान ने वहां बड़ा स्कूल व अस्पताल खोलने की वकालत की है। कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने वहां इस्लामिक यूनिवर्सिटी खोलने की बात कही है।

चौतरफा अलग-अलग चल रहे विचारों के बीच सुन्नी वक्फ बोर्ड फिलहाल इस मामले में कानूनी राय लेगा। बोर्ड सबसे पहले 26 नवंबर को एक अहम बैठक करने जा रहा है। इसमें पांच एकड़ जमीन ली जाए या न ली जाए, इस पर फैसला होगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मस्जिद के लिए मिलने वाली जमीन पर क्या दूसरी गतिविधियां की जा सकती हैं, इस पर फैसला कानूनी राय आने के बाद लिया जाएगा। यदि कानून ने इजाजत दी तो वहां मस्जिद बनाने के साथ ही अन्य चैरिटेबिल कार्य किए जा सकते हैं।

इस बारे में सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने कहा कि अभी बोर्ड ने जमीन के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। यह मसला 26 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। सभी सदस्यों की राय आने के बाद सर्वसम्मति से फैसला लिया जाएगा। बता दें कि राम मंदिर विवाद पर फैसला आने के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारुकी ने कहा है कि बोर्ड अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा।

सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ ने शनिवार (09 नवंबर, 2019) को देश के सबसे पुराने मुकदमे श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर फैसला सुनाया है। पीठ ने कहा है कि जन्मभूमि रामलला विराजमान की है। कोर्ट ने राम मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। यह भी फैसला सुनाया कि मस्जिद बनाने के लिए सरकार अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन मुहैय्या कराए।

Posted By: Umesh Tiwari

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