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लखनऊ[राजीव बाजपेयी]। नवाबों के शहर में दो दशक बाद होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय मैच को लेकर जहां हर तरफ उत्साह है, वहीं क्रिकेट पिच के मिजाज को लेकर भी चर्चाएं आम हैं। यह बात अलग है कि ऑफ द फील्ड इसके खास मायने नहीं हैं लेकिन ऑन द फील्ड भी पिच को लेकर अंदरखाने बहुत कुछ चल रहा है।

इकाना का स्टेडियम दूधिया रोशनी में दुल्हन की तरह तैयार है। कोलकाता में जो हुआ यहां के दर्शक उसकी उम्मीद तो कतई नहीं कर रहे हैं। छोटी दिवाली पर इकाना की 22 गज की पिच पर दर्शकों को बड़े धमाकों की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए मुफीद पिच होना जरूरी है। मंगलवार को पिच क्या गुल खिलाएगी दर्शकों से लेकर टीम प्रबंधन और सटोरियों के लिए भी पहेली बनी है। नई पिच पर टॉस अहम साबित हो सकता है। पहले बैटिंग या फील्डिंग के फैसले तो अमूमन मैदान के आंकड़ों को देखकर ही लिये जाते हैं, लेकिन यहां पर तो पारखी नजर ही इसका आधार बनने वाली है। जो पिच को समङोगा वही बाजी मारेगा। इकाना में नौ पिच हैं लेकिन तय किया गया है कि पिच नंबर पांच पर मैच खेला जाएगा। काली मिट्टी से बनी इस पिच को बल्लेबाजों के लिए मुफीद माना जा रहा है। मुख्य क्यूरेटर दलजीत सिंह ने पिच की कमान संभाली है तो उम्मीद सबको है कि रनों की आतिशबाजी होगी। 

मोहाली की पिच को भी दलजीत ने ही पहचान दिलाई है। वैसे ही उम्मीद यहां भी है, लेकिन कई सवाल भी हैं। बीते साल यहां पर रणजी और दलीप ट्राफी के मैच खेले गए। उत्तर प्रदेश का रेलवे से और महाराष्ट्र से मुकाबला हुआ। दोनो मैचों की आठ पारियों में सर्वाधिक स्कोर 312 रन था, जो महाराष्ट्र ने बनाया था। इससे पता चलता है कि पिच का मिजाज बल्लेबाजों के माफिक नहीं है। वहीं दलीप ट्राफी में इंडिया रेड और ग्रीन के बीच मैच की चार पारियों में सर्वाधिक स्कोर 323 था। इंडिया रेड और इंडिया ब्ल्यू के बीच मैच में हालांकि बड़ा स्कोर बना। इंडिया रेड ने पहली पारी में 483 रन बना डाले। हालांकि मैचों को हुए समय हो चुका है और अब पिच को नए सिरे से तैयार किया गया है। देखना होगा कि मंगलवार को शहर में अधिक आतिशबाजी होती है या फिर इकाना में।

Posted By: Anurag Gupta

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