लखनऊ, जेएनएन। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), ट्रामा सेंटर, डफरिन आदि स्थानों पर मार्गों के बाहर आम दिनों की तरह एंबुलेंस की कतारें नहीं थीं। गिनी-चुनी एंबुलेंस दूर-दूर खड़ी मिलीं। रेट में थोड़ा सुधार आया जरूर लेकिन मौका देख फायदा उठाने में आज भी पीछे नहीं रहे एंबुलेंस संचालक। लगातार कार्रवाई के बाद आज एंबुलेंस संचालकों की मनमानी रोकने के लिए नोटस जारी की गई तो एक के कागजात जब्त कर उसका चालान कर दिया गया।

केस एक- मुंशी पुलिया स्थित कोवा अस्पताल से विवेकानंद चिकित्सालय में मरीज को शिफ्ट करने लिए एंबुलेंस संचालक से बात की गई। ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस का 10,000 रुपये मांगा गया। इसकी शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय को की गई। एआरटीओ संजय तिवारी, गाजीपुर निरीक्षक, पीटीओ आशुतोष उपाध्याय, रविचंद्र त्यागी, टीआई समेत मौजूद अधिकारियों ने इसकी तस्दीक करने के बाद एंबुलेंस संख्या यूपी32 केएन-6712 के संचालक को नोटिस जारी कर दी गई।

केस दो- केजीएमयू के बाहर का है। यहां पर जब प्रवर्तन टीम ने पांच किमी. दूरी तक मरीज को पहुंचाने का किराया पूछा तो 1500 रुपये बताया गया। जबकि इस दूरी का 1000 रुपये से ज्यादा किराया नहीं बनता है। अधिकारियों ने एंबुलेंस संख्या यूपी32 जेएन-6771 का चालान कर कागज जब्त कर लिए।

केस तीन- लिंब सेंटर के सामने बने फुटपाथ पर खड़ी एंबुलेंस संख्या यूपी90 टी-1944 से उतर रहे चालक से बाराबंकी तक मरीज छोड़ने को कहा गया। चालक ने अपना नाम सोनू बताया। कहा कि छह हजार रुपये बिना ऑक्सीजन के लगेंगे। मोल-तोल करने पर चालक ने अपना फोन नंबर दिया कहा कि बात पक्की हो जाए तो फोन करिएगा। बुकिंग के नाम पर मनमानी कर रहे एंबुलेंस चालकों के यह उदाहरण बताने के लिए काफी हैं कि मनमानी अभी जारी है।

विंड स्क्रीन पर तत्काल लगाएं डीएम की किराया सूची: एआरटीओ संजय तिवारी ने एंबुलेंस संचालकों को साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि जिला प्रशासन द्वारा तय की गई किराया सूची एंबुलेंस संचालक विंड स्क्रीन पर तत्काल लगाएं नहीं तो बड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन इस पर गंभीर है।