कोडीन सीरप मामला: 3 स्तर की बिलिंग के बाद सप्लाई चेन गायब, STF कर रही वास्तविक खपत की जांच
एसटीएफ को कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध आपूर्ति मामले में बिलिंग के तीन स्तरों के बाद वैध बिक्री की पूरी ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
एसटीएफ को कफ सीरप बिक्री की कड़ी नहीं मिली।
तीन स्तर की बिलिंग के बाद रिकॉर्ड गायब।
फर्मों के बीच वास्तविक खपत की पड़ताल जारी।
आदित्य तिवारी, लखनऊ। कोडीनयुक्त कफ सीरप की आपूर्ति से जुड़े मामले की जांच में एसटीएफ को अभी तक बिलिंग की तीन स्तरों वाली व्यवस्था के बाद इसकी वैध बिक्री की पूरी कड़ी नहीं मिली है।
एसटीएफ की चौथी चार्जशीट में संबंधित फर्मों के बीच सीरप की खरीद-बिक्री के दस्तावेज तो मिले, लेकिन इसके बाद मेडिकल स्टोर तक पहुंचने और मरीजों को बिक्री किए जाने से संबंधित रिकार्ड जांच एजेंसी के सामने नहीं आया है। अब एसटीएफ इस अंतर की पड़ताल कर रही है कि फर्मों के बीच बिलिंग के बाद सीरप की वास्तविक आपूर्ति और खपत कहां हुई।
जांच के अनुसार, संबंधित सीरप की खरीद सुपर डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से एबाट कंपनी से किए जाने का रिकार्ड सामने आया। इसके बाद सप्लाई अलग-अलग फर्मों के नाम पर दिखाई गई। अब इन फर्मों के बिल, स्टाक, बैंक खातों और उपलब्ध अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। दवा कारोबार में सप्लाई की कड़ी और बिक्री का रिकार्ड उपलब्ध होना चाहिए। इस मामले में तीन स्तर की बिलिंग के बाद उस कड़ी का पूरा दस्तावेजी विवरण अभी तक नहीं मिला है।
जांच में क्या आया सामने?
जांच में सामने आए कारोबारी रिकार्ड में कई फर्मों के नाम शामिल हैं। जीआर ट्रेडिंग कंपनी के नाम से वर्ष 2019 में 4,04,13,752 रुपये के लेन-देन का विवरण जांच में आया है। मारुति मेडिकोज से 17,49,272 रुपये और एवी फार्मास्यूटिकल्स से 45,98,100 रुपये के लेन-देन की जानकारी भी जांच में शामिल है। सैली ट्रेडर्स के नाम से 2,69,66,140 रुपये की बिलिंग का विवरण भी जांचा जा रहा है।
एसटीएफ ने सैली ट्रेडर्स से जुड़े कारोबारी संबंधों और शुभम जायसवाल से संबंधित कड़ियों की भी पड़ताल की है। वर्ष 2023 में स्टाकिस्ट कीमत 132.09 रुपये और एमआरपी 205 रुपये बताई गई है। वर्ष 2024 में स्टाकिस्ट कीमत 145.30 रुपये और एमआरपी 226 रुपये रही।
यह भी पढ़ें- यूपी में प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड से केला पकाने के 25 केंद्र बंद, 132 को थमाया नोटिस
एसटीएफ इन कीमतों, बिलों और सप्लाई की मात्रा का मिलान कर रही है। अभी तक की जांच में वर्ष 2017 में सहारनपुर से जुड़ी शुरुआती कड़ियों और वर्ष 2021 में विभोर राणा से संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल की गई है। वहीं, एसटीएफ सप्लाई चेन में उन चार लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जो इस मामले में सीधे तौर पर शामिल थे।
