लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। शहद के बारे में शायद ही ऐसा कोई हो जो न जानता है। मेकअप से लेकर सेहत तक में प्रयोग होने वाले इस शहद का उत्पादन करने वाली मधुमक्खी के बारे में भी आप जानते होंगे। खेती के साथ किसानों को इस व्यवसाय से जोड़ने के लिए खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और उद्यान विभाग प्रयास तो करता है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण अनुकूल वातावरण की कमी किसानों को इससे दूर कर रही है। मधुमक्खी पालन के विशेषज्ञ डा.नितिन कुमार सिंह ने बताया कि किसान खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर लें तो अधिक फायदा होगा। पांच हजार कीमत का मधुमक्खी पालन का बाक्स किसानों को पांच हजार वार्षिक आमदनी दे सकता है। शहद के अलावा कई उत्पाद उनकी आमदनी में इजाफा करते हैं। 

एक साल में 50 किग्रा शहदः एक बाक्स से एक साल में 50 किग्रा शहद का उत्पादन होता है। 80 से 120 रुपये प्रति किग्रा शहद थोक बाजार में बिकता है। डा. नितिन कुमार सिंह ने बताया कि किसान खादी ग्रामोद्योग से जुड़कर इस व्यवसाय को अपना सकते हैं। छत या बाहर खेतों में बाक्स को रखा जा सकता है। एक बाक्स एक साल में बिना किसी खर्च के पांच हजार का शहद देता है। अन्य सामग्रियों से अलग फायदा होता है। 

यहां से मिलेगी सहायताः किसान जिला उद्यान कार्यालय या फिर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के कार्यालय से संपर्क कर मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के साथ ही सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान की जानकारी ले सकते हैं। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एलके नाग ने बताया कि मधुमक्खी पालन में अनुदान के साथ ही प्रशिक्षण दिया जाता है। 

50 फीसद मिलता है अनुदानः उद्यान विभाग की ओर से 50 फीसद अनुदान भी दिया जाता है। विभाग की ओर से 50 बाक्स के एवज में 80 हजार का अनुदान किसानों को दिया जाता है। अनुदान के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। ब्लाक स्तर पर भी इसकी जानकारी किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से दी जाती है। 

अगले महीने से शुरू करें पालनः फरवरी से मार्च तक का महीना मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल माना जाता है। उद्यान विशेषज्ञ बालिशरण चौधरी ने बताया कि इन दिनों हरियाली अधिक रहती है। इससे किसानों को अधिक फायदा मिलता है। इस महीने में खेतों में हरियाली के साथ ही पर्यावरण भी हरा भरा रहता है।

Edited By: Vikas Mishra