यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिल्डर को फायदा पहुंचाने के दोषी मिले ग्रेटर नोएडा के छह बिजली अभियंता, विभाग को लगाया करोड़ों का चूना
ग्रेटर नोएडा के गौरसंस रियलटैक को कनेक्शन देने में 8.36 करोड़ रुपये का लगाया चूना। बर्खास्तगी की है तैयारी। इस ...और पढ़ें

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। अस्थाई कनेक्शन में अनियमितताओं के बाद ग्रेटर नोएडा में स्थाई बिजली कनेक्शन देने में भी बड़ी गड़बड़ी मिली है। बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर अभियंताओं ने पावर कारपोरेशन को लगभग 8.36 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। जांच में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (तकनीकी) राकेश कुमार राना (ग्रेटर नोएडा के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता), वितरण खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता लाल सिंह राकेश व प्रभात कुमार सिंह, पारेषण के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार, एसडीओ अजय कुमार व अवर अभियंता अरविंद कुमार दोषी पाए गए हैं। पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने सभी को आरोप पत्र दे दिए गए हैं। इस संबंध में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट पर प्रबंधन सभी के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई करने की तैयारी में हैं।
दरअसल, पावर कारपोरेशन प्रबंधन को एक गोपनीय शिकायत मिली थी कि ग्रेटर नोएडा के मै. गौरसंस रियलटैक प्रा. लि. के गौर सौंदर्यम आवासीय योजना को बिजली कनेक्शन देने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। प्रबंधन द्वारा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक के माध्यम से कराई गई जांच में शिकायत सही पाई गई। जांच में पाया गया कि नियमों की अनदेखी कर आवासीय योजना को 220 केवी के ट्रांसमिशन(पारेषण) सब स्टेशन के बजाय सीधे 33/11 केवी उपकेंद्र इटैहरा से कनेक्शन दे दिया। इस तरह योजना को कनेक्शन देने में गलत रिपोर्ट दी गई। 33 केवी स्वतंत्र फीडर के लिए बिल्डर से शुल्क नहीं लिया गया। बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कनेक्शन के लोड की भी सही से गणना नहीं की गई। लोड में हेरा-फेरी कर 5200 केवीए का कनेक्शन बिना मुख्य अभियंता पारेषण की मंजूरी के दिया गया जबकि लोड 5855 केवीए होना चाहिए था। केबिल की लागत भी कम दिखाकर बिल्डर से कम सुपरविजन शुल्क ही लिया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की अनियमितताओं से 8.36 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि पहुंचाई गई है।
कारपोरेशन के अध्यक्ष एम देवराज ने बताया कि जांच में दोषी पाए गए अभियंताओं को आरोप पत्र दे दिए गए हैं। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक सूर्य पाल गंगवार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में निदेशक (वित्त) और विद्युत सेवा आयोग के अध्यक्ष को रखा गया है। समिति आरोपों के जवाब का परीक्षण कर एक माह में रिपोर्ट प्रबंधन को देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रबंधन दोषियों के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई करने की तैयारी में है। चूंकि वर्तमान में निदेशक के पद पर तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को भी पूरे मामले के लिए मुख्य रूप से दोषी पाया गया है इसलिए इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इस संबंध में अवगत कराया गया है।
सूत्र बताते हैं कि समिति की रिपोर्ट पर प्रबंधन सभी के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। एनसीआर से जुड़ी कुछ और शिकायतों की भी प्रबंधन द्वारा जांच कराई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों अस्थाई कनेक्शन देने में लगभग 100 करोड़ रुपये का चूना कारपोरेशन को लगाए जाने का मामला भी सामने आया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कई अभियंता निलंबित किए जा चुके हैं। इस मामले में भी कुछ अधिकारियों -कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने की तैयारी है।
