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लखनऊ SGPGI में बनेगी प्रदेश की पहली एडवांस हाईब्रिड कार्डियक कैथ लैब, AI और सर्जरी तकनीक की होगी सुविधा

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:31 PM (IST)

एसजीपीजीआई लखनऊ में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक हाइब्रिड कैथ लैब बनेगी, जिससे हृदय रोगियों को उच्चस्तरीय क्वाटरनरी कार्डियक केयर मिलेगी।

एसजीपीजीआई में बनेगी प्रदेश की पहली एडवांस हाईब्रिड कार्डियक कैथ लैब।

एसजीपीजीआई में बनेगी प्रदेश की पहली एडवांस हाईब्रिड कार्डियक कैथ लैब।

HighLights

  1. एसजीपीजीआई लखनऊ में प्रदेश की पहली हाइब्रिड कैथ लैब स्थापित होगी।

  2. यह लैब एआई, 3डी इमेजिंग और रोबोटिक सर्जरी से लैस होगी।

  3. जटिल हृदय रोगों के लिए उच्चस्तरीय क्वाटरनरी कार्डियक केयर मिलेगी।

विकास मिश्र, लखनऊ। हृदय रोगियों की बढ़ती संख्या और जटिल मामलों के बेहतर उपचार की जरूरत को देखते हुए एसजीपीजीआई में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक हाइब्रिड कैथ लैब बनेगी। इसका उद्देश्य संस्थान को क्वाटरनरी कार्डियक केयर यानी हृदय रोगों की सबसे उच्चस्तरीय सुविधाओं से लैस केंद्र के रूप में विकसित करना है।

जिसमें हार्ट फेल्योर, हार्ट ट्रांसप्लांट, जन्मजात हृदय रोगों के जटिल मामले, नवजात शिशुओं की हृदय संबंधी समस्याएं, संरचनात्मक बीमारियों का उपचार और महाधमनी से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके माध्यम से प्रदेश के मरीजों को जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर के अनुसार, प्रस्तावित हाइब्रिड कैथ लैब में कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, कार्डियक एनेस्थीसिया, इमेजिंग, क्रिटिकल केयर और परफ्यूजन विशेषज्ञों को एक साझा तकनीकी व्यवस्था के तहत काम करने का अवसर मिलेगा। इससे कैथेटर आधारित इंटरवेंशनल प्रक्रिया और सर्जरी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था में वयस्कों और बच्चों के हृदय की बीमारियों का उपचार, जटिल कोरोनरी प्रक्रियाएं, कम चीरा लगाकर की जाने वाली हृदय सर्जरी और महाधमनी से संबंधित एडवांस एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाएं शामिल होंगी। लैब की स्थापना और जरूरी उपकरण पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

एआई, 3डी इमेजिंग और आधुनिक सर्जरी तकनीक की होगी सुविधा

संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि क्वाटरनरी कार्डियक केयर योजना में एडवांस कार्डियक इमेजिंग, 3डी नेविगेशन, रोबोटिक और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित जांच की सुविधा होगी।

इसके साथ ही लैब में गंभीर मरीजों के लिए एक्स्ट्राकार्पोरियल मेम्ब्रेन आक्सीजनेशन और मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट जैसी जीवनरक्षक तकनीकों को भी स्थापित किया जाएगा। इन तकनीकों का उद्देश्य जटिल बीमारियों की पहचान, उपचार की दिशा और गंभीर मरीजों की देखभाल को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित योजना में हृदय प्रत्यारोपण पर भी विशेष जोर दिया गया है।

इसके अलावा वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (वीएडी) और प्रत्यारोपण तक मरीज को सुरक्षित बनाए रखने वाली ब्रिज-टू-ट्रांसप्लांट रणनीतियों को भी बनाने की योजना है। वीएडी एक ऐसा उपकरण है, जो कमजोर हृदय को रक्त पंप करने में सहायता देता है।

प्रो. धीमान के मुताबिक, योजना के तहत रोबोटिक पीसीआई यानी रोबोट की सहायता से कोरोनरी एंजियोप्लास्टी, एआई आधारित सटीक जांच, एडवांस इमेजिंग और मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप डिजिटल ट्विन माडल जैसी तकनीकों को भी विकसित करना है। शासन ने हाईब्रिड कार्डियक कैथ लैब के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जल्द निर्माण शुरू होगा।

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