न मंहगी कोचिंग, न ढेर सारी किताबें... सेल्फ स्टडी से यूपी के सत्यांश ने पास की UPSC परीक्षा, बताई सफलता की कहानी
सत्यांश वर्मा ने सीएपीएफ परीक्षा-2025 में 85वीं रैंक हासिल कर यह साबित किया कि महंगी कोचिंग के बजाय सेल्फ-स्टडी, चुनिंदा किताबों और रिवीजन से भी सफलता मिल सकती है।

सत्यांश वर्मा
HighLights
सत्यांश वर्मा ने सीएपीएफ में 85वीं रैंक हासिल की।
महंगी कोचिंग के बजाय सेल्फ-स्टडी को बनाया आधार।
लगातार रिवीजन, मॉक टेस्ट और रणनीति सुधार से मिली सफलता।
अखिल सक्सेना, लखनऊ। संघ लोक सेवा आयोग की सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) परीक्षा-2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 85वीं रैंक लाने वाले सत्यांश वर्मा उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सिविल सेवा की तैयारी को महंगी कोचिंग और ढेरों किताबों से जोड़कर देखते हैं।
सत्यांश ने स्नातक के समय से ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू की, चुनिंदा किताबों और यू-ट्यूब के निशुल्क व्याख्यानों को आधार बनाया। सबसे ज्यादा जोर रिवीजन, लिखने के अभ्यास और मॉक टेस्ट पर दिया। कई बार असफलता के बाद हर बार उन्होंने रणनीति में सुधार किया। इसी तैयारी के साथ सीएपीएफ परीक्षा में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर सफलता पाई है। आगे भी वह आइएएस के लिए तैयारी में जुटे हैं।
बिस्वां, सीतापुर के रहने वाले सत्यांश वर्मा के पिता ओम प्रकाश वर्मा अधिवक्ता हैं, जबकि मां हेमा वर्मा गृहिणी हैं। सत्यांश बताते हैं कि 10वीं के बाद ही मन में सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य स्पष्ट हो गया था।
दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में स्नातक और बीएचयू से पालिटिकल साइंस में एमए किया। पढ़ाई के साथ जेआरएफ-2024 भी क्वालीफाई किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी के रूप में 2023-24 से अवध गर्ल्स पीजी कालेज की प्रो. प्रीति अवस्थी के निर्देशन में पालिटिकल साइंस विषय में पीएचडी कर रहे हैं।
कोचिंग नहीं, सेल्फ स्टडी पर फोकस
वह बताते हैं कि यूपीएससी के लिए किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। शुरुआत में पालिटी के लिए लक्ष्मीकांत, इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम और अर्थव्यवस्था के लिए मृणाल पटेल और भूगोल के लिए यू-ट्यूब व्याख्यानों से पढ़ाई की। अपने नोट्स तैयार किए। उन्हीं को बार-बार दोहराया।
सत्यांश ने बताया कि किसी विषय की दस अलग-अलग किताबें पढ़ने के बजाय एक अच्छी किताब को बार-बार पढ़ना ज्यादा उपयोगी है। परीक्षा से पहले प्रत्येक विषय का पांच से छह बार रिवीजन किया। लगातार माक टेस्ट दिए, जिससे परीक्षा के माहौल और समय प्रबंधन की आदत बनी।
असफलताओं ने बदली तैयारी की रणनीति
वर्ष 2024 में सत्यांश ने यूपीएससी की मुख्य परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। यूपीपीसीएस-2024 में भी मुख्य परीक्षा से महज तीन अंक से पीछे रह गए। वर्ष 2025 में यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर सके। लगातार परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने से निराशा हुई, लेकिन उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर रणनीति पर दोबारा काम किया।
सत्यांश मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षा में केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उसे तय समय में सही तरीके से प्रस्तुत करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए मैंने खूब लिखकर अभ्यास किया। मॉक टेस्ट और उत्तर लेखन के जरिए परीक्षा के दबाव को संभालना सीखा।
