विधानसभा चुनाव से पहले सपा में गुटबाजी पर सख्ती, संगठन को एकजुट रखने की चुनौती
समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी और निष्क्रियता से जूझ रही है, जिसके चलते तीन महीने में छह जिला इकाइयां भंग की गई हैं।

HighLights
तीन महीने में छह जिला इकाइयां भंग की गईं।
गुटबाजी और निष्क्रियता पर सपा की सख्त कार्रवाई।
चुनाव से पहले नाराज नेताओं को एकजुट रखने की कोशिश।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के सामने भाजपा के चुनावी नैरेटिव का मुकाबला करने और पीडीए के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने के साथ अपने संगठन की गुटबाजी की गांठ खोलने की चुनौती भी है।
पिछले तीन महीनों में छह जिलों में संगठनात्मक ढांचे पर हुई कार्रवाई ने पार्टी की अंदरूनी परेशानियों को सामने ला दिया है। पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर गुटबाजी, अनुशासन और सक्रियता एक बड़ी समस्या है।
ऐसे में पार्टी नेतृत्व को एक तरफ संगठन में अनुशासन कायम करना और दूसरी तरफ नाराज नेताओं को साथ लेकर चलना, ताकि चुनाव के समय अंदर की खींचतान भारी न पड़े।
भीड़ नहीं जुटी तो भंग हुई कार्यकारिणी
कन्नौज में पीडीए सम्मेलन में भीड़ न जुटने पर रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर वहां के जिलाध्यक्ष समेत कार्यकारिणी भंग कर दी गई। इससे पहले फर्रुखाबाद, एटा, कासगंज, मथुरा और गोरखपुर में संगठनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। एटा और कासगंज में विवाद, गोरखपुर में मारपीट और कन्नौज में कमजोर आयोजन, ये अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन इनका चुनावी असर एक जैसा हो सकता है।
सपा नेतृत्व के सामने मुश्किल यह है कि संगठन में अनुशासन के लिए सख्ती जरूरी है, परंतु चुनावी समीकरण साधने के लिए नेताओं को साथ रखना भी उतना ही अहम है, क्योंकि चुनाव नजदीक आने के साथ टिकट की दावेदारी, स्थानीय वर्चस्व और दूसरे नेताओं को तरजीह दिए जाने जैसे मुद्दों पर असंतोष बढ़ने की आशंका रहती है। नाराजगी यदि समय रहते दूर न हुई तो इसका भीतरघात या दल-बदल के रूप में भी सामने आ सकता है।
संगठन को एकजुट रखना चाहती है पार्टी
वहीं, सपा इस समय मतदाता पुनरीक्षण और बूथों तक सदस्यता का अभियान चला रही है। ऊपर से पीडीए के सामाजिक समीकरण को चुनावी समर्थन में बदलने के लिए भी स्थानीय संगठन की भूमिका अहम है।
ऐसे अभियान तभी प्रभावी होंगे, जब जिला नेतृत्व और बूथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल हो। ऐसे में नाराज नेताओं को मनाना, उनके समर्थकों को संगठन से जोड़े रखना और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करना, ये काम एक साथ करने की कोशिश है।
पार्टी अध्यक्ष पहले भी नेताओं को समझाने और मनाने की जरूरत जता चुके हैं। इसके लिए जिलों के गुटों को साथ बिठाकर सुलह कराई जा रही है, नई टीम के गठन में भी सभी धड़ों के प्रतिनिधित्व की कसरत है, जिससे संतुलन बना रहे। साफ है कि पार्टी संवाद के माध्यम से भी संगठन को एकजुट रखना चाहती है।
