आजम खां के सहारे समाजवादी पार्टी के 'एम' समीकरण को सहेजेंगे अखिलेश यादव, रामपुर जेल में होगी मुलाकात
Akhilesh Yadav: रामपुर जेल में सजा काट रहे आजम खां और अखिलेश यादव की गुरुवार को मुलाकात है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव आजम खां

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने विधान सभा चुनाव से पहले मुस्लिम राजनीति में प्रतिनिधित्व, नेतृत्व और राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल फिर चर्चा में है। रामपुर में एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता ने सपा के सामने अपने 'एम' (मुस्लिम) समीकरण को सहेजने की चुनौती बढ़ा दी है।
ओवैसी ने मुस्लिम युवाओं को खुद नेतृत्व संभालने का आह्वान करते हुए सपा पर निशाना साधा है। ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का गुरुवार को रामपुर जाकर आजम खां से जेल में मुलाकात करना, मुस्लिम मतदाताओं के बीच भरोसा बनाए रखने और पार्टी के पुराने मुस्लिम नेतृत्व के साथ खड़े होने का संदेश देने की कोशिश है।
रामपुर जेल में सजा काट रहे आजम खां और अखिलेश यादव की मुलाकात हैं। सियासी हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि आजम अपनी पसंद और वफादार लोगों को 2027 में टिकट दिलाने की बिसात बिछाएंगे। इसके लिए अखिलेश यादव को नाम उनके सुझाकर उनपर अंतिम मुहर लगवा सकते हैं। इसी के साथ मुलाकात में संभल मस्जिद विवाद के बाद हुई हिंसा को लेकर की गई कार्रवाई में फंसे लोगों को राहत कैसे मिले, इस पर भी चर्चा मुमकिन हैं।
वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के चलते मिली सफलता के बाद भले ही सपा प्रमुख इसके सामाजिक विस्तार की कोशिश में जुटे हैं, फिर भी पार्टी के लिए सबसे मजबूत अब भी एमवाई (मुस्लिम, यादव) समीकरण ही है। परंतु सपा इस समाज से जुड़े मुद्दों पर पहले के मुकाबले कम मुखर दिखती है। इस बीच ओवैसी लगातार मुस्लिमों के मुद्दे पर सपा को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
औवेसी ने हाल ही में रामपुर की सभा में सपा की आलोचना की और तर्क दिया मुस्लिम मतदाता विभिन्न दलों को समर्थन देते रहे हैं, लेकिन समुदाय के भीतर से स्वतंत्र नेतृत्व को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। दूसरी तरफ बसपा सहित अन्य दल भी मुस्लिमों में पैठ बढ़ाने की कोशिश में हैं।
ऐसे में सपा अपने इस वोट बैंक पर कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं। अखिलेश की आजम से मुलाकात को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सपा प्रमुख की कोशिश यह संदेश देने की है कि पार्टी अपने पुराने और प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं को महत्व देती है। आजम खां की अहमियत मुस्लिम चेहरे के साथ रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनके व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव के कारण भी है।
जेल में उनकी अनुपस्थिति के बीच स्थानीय संगठन को एकजुट रखना, समर्थकों का भरोसा बनाए रखना और चुनावी दावेदारों के बीच संतुलन, सपा के लिए चुनौती है। हाल ही में आजम की पत्नी तंजीन फात्मा ने सपा प्रमुख से मुलाकात की थी, इसके बाद ही यह दौरा तय हुआ है। दो माह पहले शिवपाल यादव भी आजम से जेल में मिले थे और सरकार बनने पर उनको महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात कही थी।
अब सपा प्रमुख के सामने मुस्लिम मतदाताओं के बीच पुराना भरोसे को बनाए रखने के साथ नेतृत्व और हिस्सेदारी की नई बहस का जवाब देने की भी है। रामपुर में यह मुलाकात रिश्तों का संदेश तो देगी ही, साथ ही यह भी परखेगी कि आजम खां की राजनीतिक विरासत और प्रभाव को सपा 2027 की चुनावी रणनीति से किस तरह जोड़ती है।
