सावधान! हर 10 में से एक भारतीय किडनी रोग की चपेट में: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इन लक्षणों को नजरअंदाज?
देश में हर 10 में से एक व्यक्ति गंभीर किडनी रोग से प्रभावित है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, लखनऊ। देश में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी से वद्धि हो रही है। हर 10 में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में किडनी की गंभीर बीमारी से प्रभावित है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि आने वाले समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
किडनी की बीमारियां अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती हैं, जिसके कारण अधिकतर मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है। जलवायु परिवर्तन व पर्यावरणीय कारणों से समस्या और गंभीर हो गई है।
ये जानकारी लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिलाष चंद्रा ने दी। वह शनिवार को लोहिया संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से प्लैनेटरी हेल्थ इन नेफ्रोलॉजी विषय पर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने किया।
प्रो. अभिलाष चन्द्रा ने कहा, असुरक्षित पानी, बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण और जहरीले तत्व अब किडनी की बीमारियों के बड़े कारण बनते जा रहे हैं। गंदा पानी पीने से शरीर में संक्रमण और हानिकारक तत्व पहुंचते हैं। जो धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अनियमित खानपान, मोटापा और अत्यधिक दवाओं का सेवन भी किडनी खराब होने के प्रमुख कारण हैं। पानी कम पीना और लंबे समय तक दर्दनिवारक दवाओं का उपयोग भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है।
इन वजहों से भी खराब हो रही किडनी
प्रो. सीएम सिंह ने कहा कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) और जहरीली गैसें शरीर में प्रवेश कर रक्त के जरिए किडनी तक पहुंचती हैं। ये कण किडनी की नाजुक फिल्टरिंग प्रणाली को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
कृषि में उपयोग होने वाले रासायनिक कीटनाशक भी किडनी के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। इन रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से शरीर में विषाक्त तत्व जमा हो जाते हैं, जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
खासतौर पर किसानों और कृषि कार्य से जुड़े लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जा रहा है। इस मौके पर सीएमएस प्रो. विक्रम सिंह, एमएस प्रो. अरविंद सिंह और डा. प्रत्यूष कुमार भी मौजूद रहे।
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