लखनऊ [दुर्गा शर्मा]। 'सर्विस बिफोर सेल्फ'  अपने से पहले दूसरे के विषय में सोचिए। इसी सूत्रवाक्य को सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी स्कवाड्रन लीडर राखी अग्रवाल ने अपनी जिंदगी का फलसफा बना लिया। सरस्वती शिशु मंदिर के अनुशासित और प्रेरणादायक वातावरण वाले प्रांगण में राखी को जो संस्कार मिले उनके कारण वो बचपन से ही कुछ बनने के कुछ अलग करने के सपने संजोने लगीं। समझदार हुईं तो अपने आसपास की बातों और प्रेरणादायी लोगों से प्रभावित होकर खुद को एक वर्दीधारी ऑफिसर की तरह देखने लगीं। जैसे ही पता चला कि डिफेंस सर्विसेज में महिलाओं की भर्ती प्रारंभ हो गई तो बस वहीं से एक दिशा मिल गई।

राखी कहती हैं, दिन रात प्रयत्न किया और पहले ही प्रयास में सफलता मिली। मैं भारतीय वायुसेना की एक अधिकारी बन गई। घर का परिवेश शैक्षिक था, सबका खूब साथ मिला। पढ़ाई, लिखाई, खेलकूद अन्य गतिविधियों में मैं हमेशा से आगे थी। पर हां! शुरू से हिंदी माध्यम में शिक्षा लेने के कारण मुझे अगर कुछ आवश्यकता थी तो वो थी अपनी अंग्रेजी की कन्वरसेशन स्किल्स को बढ़ाने की, उस पर मैंने काम किया। इसके सकारात्मक नतीजे भी आए। मगर यह भी महसूस किया कि भाषा व्यवधान कभी नहीं बनती, आपको संवाद करना आना चाहिए। अपनी बात आत्मविश्वास के साथ तर्कपूर्ण तरीके से कहना आना चाहिए। मैंने अपने एसएसबी इंटरव्यू में भी और सर्विस के भी दौरान जब जरूरत पड़ी हिंदी भाषा का प्रयोग किया और साथ ही साथ अंग्रेजी भाषा को भी पूरे प्रयास से अपनी ताकत बनाया। 11 साल तक एयरफोर्स में काम कर सेवानिवृत्ति के बाद आइआइएम अहमदाबाद से मैनेजमेंट कोर्स किया। उसके बाद कार्पोरेट और सिविल एविएशन में वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारी संभाली। राखी कहती हैं, मैंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी।

लगातार अपने कार्य क्षेत्र के अनुसार उससे जुड़ी हुई अपनी योग्यता बढ़ाती रही। कुछ नया सीखने की लगन के कारण नई जिम्मेदारियां लेती रही। इसी कारण बहुत ही अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारियां मुझे सौंपी गई। जैसे एक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर होने के कारण एयरपोर्ट मैनेजमेंट, एयरपोर्ट ऑपरेशंस, फ्लाइट सेफ्टी यह मेरे क्षेत्र का हिस्सा थे मगर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस डिवीजन को, क्वालिटी कंट्रोल एंड ऑडिट, कंस्ट्रक्शन फील्ड जैसे क्षेत्रों को हेड करना बिल्कुल नया था। चुनौतियां स्वीकारना मेरी आदत है, इसलिए मैंने हमेशा पूर्ण दक्षता कौशल और जुझारूपन से हर कार्य के साथ न्याय किया। सेवानिवृत्त होने के बाद भी राखी की सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। वो संगीत शिक्षा के साथ ही अखिल भारतीय और प्रादेशिक पूर्व सैनिक संगठनों से भी जुड़ी हैं। इसके चलते राखी सैनिक भाइयों की समस्याओं का निराकरण करने के लिए भी भरसक प्रयत्न करती रहती हैं।

संगीत से मिलती ऊर्जा

संगीत बचपन से ही मेरे साथ था, हर जगह साथ रहा। शायद संगीत के कारण ही मैं अपनी विविधतापूर्ण जिंदगी में सामंजस्य बिठा पाई। मेरे अंदर ऊर्जा भरने का काम, किसी कार्य पर पूरी तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मेरी मदद मेरे खुद के विचारों और संगीत ने की। संगीत की अधूरी छूट गई शिक्षा को सेवानिवृत्त होने के बाद आगे बढ़ाया। भातखंडे संगीत विद्यापीठ से संगीत निपुण किया, इंदिरा कला विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से संगीत में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसी वर्ष नेट जेआरएफ क्वालीफाई किया और अब संगीत में ही पीएचडी कर रही हूं। इसी के साथ-साथ लोकगीत, गीत, गजल, भजन में आकाशवाणी एवं गीत नाट्य प्रभाग, संस्कृति विभाग की अनुमोदित कलाकार के साथ आकाशवाणी उद्घोषिका भी बन गई। राखी कहती हैं, लखनऊ में रहने के दौरान संगीत, साहित्य, रंगमंच, कला से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ साथ अपनी पृष्ठभूमि के चलते युवाओं को प्रेरणा देने के लिए, उन्हें जिंदगी की सही राह चुनने में मदद करने के लिए, उनके रास्ते में आने वाली समस्याओं को सुलझाने के लिए, और नारी विमर्श से संबंधित क्षेत्रों में जहां कहीं भी अपना सामाजिक सहयोग दे पाती हूं, देती रही हूं और आगे भी देती रहूंगी। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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