'राम वन गमन मार्ग' बनाने वाली कंपनी ब्लैकलिस्ट, प्रतापगढ़ से चित्रकूट के बीच के रास्ते पर दरारें मिलने के बाद एक्शन
प्रतापगढ़ से चित्रकूट के बीच राम वन गमन मार्ग (NH 731A) के निर्माण में गंभीर खामियां पाई गईं। इसके चलते ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
राम वन गमन मार्ग (NH 731A) में निर्माण खामियां उजागर।
सड़क के 14 किलोमीटर पैच में मिलीं गंभीर दरारें।
निर्माण कंपनी पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। प्रतापगढ़ से चित्रकूट के बीच 160 किलोमीटर के राम वन गमन मार्ग (एनएच 731 ए) के निर्माण में गड़बड़ी पर कार्रवाई की गई है। राम वन गमन मार्ग के किलोमीटर संख्या 35 से 49.155 के बीच खामियां उजागर होने के बाद प्रयागराज की लोक निर्माण विभाग की एनएच टीम ने जांच की थी।
टीम ने जांच में पाया गया कि 14 किलोमीटर के पैच में तमाम खामियां हैं। सड़क के डामर में बड़ी, चौड़ी और गहरी लंबवत दरारें हैं, साथ ही बिटुमिनस पेवमेंट टूटकर बिखरा पाया गया।
जांच टीम ने मौके पर पाया कि भारी वाहनों के पहियों से सड़क पर नालियां बन गई हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बोलीदाता फर्म मेसर्स एस एंड पी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सहयोगी फर्म मेसर्स राम वन गमन पथ प्राइवेट लिमिटेड को नान-परफार्मर घोषित करते हुए 14 अक्टूबर से एक साल के लिए प्रतिबंध भी लगा दिया है।
एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया
यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक कि सहयोगी फर्म सभी कमियों को ठीक नहीं कर लेती और नामित अधिकारी द्वारा उन सुधार कार्यों का एनओसी नहीं दे दी जाती। बोलीदाता फर्म एस एंड पी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सहयोगी मेसर्स राम वन गमन पथ प्राइवेट लिमिटेड को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और केंद्र प्रायोजित अन्य कार्यों में भाग लेने से प्रतिबंधित भी करने की बात कही गई है।
यह प्रतिबंध आदेश की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए या कमियों के पूरी तरह ठीक होने तक (जो भी बाद में हो), लागू रहेगा। आदेश में उल्लेख किया गया है कि कार्यदायी संस्थाओं को मौजूदा सभी कमियों को तुरंत और पूरी तरह से ठीक करना होगा।
साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोजेक्ट हाईवे को कंसेशन एग्रीमेंट और अथारिटी या इंडिपेंडेंट इंजीनियर (स्वतंत्र इंजीनियर) के निर्देशों के अनुसार सुरक्षित, सुगम और उपयोग के योग्य राष्ट्रीय राजमार्ग को बनाए रखें।
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एनएच अधिकारियों के मुताबिक एनएच -731ए के किलोमीटर 35 से किलोमीटर 49.155 तक, हाइब्रिड एन्युइटी मोड के तहत पेव्ड शोल्डर वाले चार-लेन ग्रीनफील्ड राजमार्ग का निर्माण कराया गया है।
कार्यदायी संस्थाओं को राजमार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे पहले एनएचएआइ ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली पीएनसी के खिलाफ भी कार्रवाई की थी।
