लखनऊ, जेएनएन। कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए इंतजामों की अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सराहना करने की खबर गलत है। दरअसल गुड़गांव की एक संस्था ने कोरोना काल के शुरूआती दौर में लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान यूपी सरकार द्वारा किए गए इंतजामों का एक अध्ययन किया था। इस अध्ययन के आधार पर संस्था ने सरकार के कुछ इंतजामों का समर्थन किया था। साथ ही ये भी सुझाव दिया था कि इस दौरान और क्या बेहतर इंतजाम किए जा सकते थे। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का इस अध्ययन से कोई लेनादेना नहीं है। गुड़गांव की जिस संस्था ने यूपी सरकार के प्रयासों का अध्ययन किया था, वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से संबद्ध है।

न्यूज एजेंसी IANS और यूपी सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर ये जानकारी साझा की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने लॉकडाउन के दौरान यूपी सरकार द्वारा किए गए राहत कार्यों की सराहना की है। इसके बाद दैनिक जागरण समेत, तमाम मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

अब तथ्यों की जांच करने पर पता चला है कि इस अध्ययन से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का कोई लेनादेना नहीं है। दरअसल ये अध्ययन गुड़गांव की एक संस्था Institute for Competitiveness (IFC) द्वारा किया गया था। IFC हार्वर्ड बिजनेस स्कूल माइक्रोइकोनॉमिक्स ऑफ कंपटिटिवनेस (Harvard Business School's Microeconomics of Competitiveness) से संबद्ध है।

(Disclaimer: इस खबर में कुछ तथ्यात्मक गलतियां थीं। मामला संज्ञान में आने के बाद इस खबर को सही तथ्यों के साथ अपडेट किया गया है।)

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