लखनऊ, जेएनएन। कोरोना का इलाज कर रहे निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। वह जहां एडवांस एक मुश्त पैसा नहीं जमा करा सकते हैं। वहीं भर्ती मरीजों के बिलिंग की एक कॉपी सीएमओ कार्यालय भेजनी भी अनिर्वाय होगी। साथ ही मरीज में दूसरी बीमारी के नाम पर भी बिलों का फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा।

राजधानी में पांच निजी मेडिकल कॉलेजों में कोरोना का इलाज हो रहा है। यह कॉलेज सरकार के अधीन काम कर रहे हैं। यहां भर्ती मरीजों के शुुल्क का भुगतान सीएमओ द्वारा किया जाएगा। वहीं राजधानी में साढ़े नौ सौ निजी अस्पताल रजिस्टर्ड हैं। इसमें दस निजी अस्पतालों को भी कोविड -पैनल में जोड़ा गया है। इसमें करीब सात अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हाल में ही निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना के मरीजों से एक मुश्त एक लाख रुपये एडवांस जमा कराने का मामला उछला। वहीं मरीज में कोविड के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों का इलाज दर्शाकर शुल्क अधिक वूसलने के खेल भी दबे पांव चल रहा था। ऐसे में सीएमओ डॉ. आरपी सिंह ने सभी भर्ती कोरोना मरीजों का ब्योरा, उनके कोविड के इलाज के बिल व दूसरी बीमारी के किए गए इलाज के बिल की तीन प्रतियां जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसमें बिल की एक कॉपी मरीज व एक कॉपी सीएमओ कार्यालय को अवश्य देनी होगी। उन्होंने शासन द्वारा तय शुल्क ही कोविड के मरीजों से लेने के निर्देश दिए। नियमों को दरिकनार करने पर कार्रवाई का दावा किया है।

निजी में कोरोना के इलाज का शुल्क

राजधानी के निजी कोविड अस्पतालों के लिए पांच मई को शासन ने आदेश जारी किया था। इसमें आइसोलेशन बेड के ऑक्सीजन समेत 10 हजार, आइसीयू बेड बिना वें टीलेटर के 15 हजार व आइसीयू में वेंटिलेटर के साथ 18 हजार रुपये रोज का शुल्क है। इसमें पीपीई किट का चार्ज भी जुड़ा है।

 

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