लखनऊ, (रूमा सिन्हा)। कोरोना के खौफ से लगे लॉकडाउन ने गंगा, यमुना के संग-संग प्रदूषण के चलते बुरे हाल में पहुंच चुकी गोमती नदी को भी कुछ राहत मिली। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आइआइटीआर) ने शहर में पसरी खामोशी के बीच नौ स्थलों पर सैंपलिंग की तो नतीजे चौंकाने वाले पाए गए। गोमती के पानी की पड़ताल में पाया गया कि जनवरी 2020 की तुलना में अप्रैल और मई के बीच डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ), बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), टोटल व फीकल कॉलीफॉर्म काफी घट गए, जिससे प्रदूषण की भयावहता में कमी आई है।

आइआइटीआर की ओर से शहर के नौ स्थानों घैला पुल, कुडिय़ा घाट, शहीद स्मारक, आइआइटीआर के सामने, खाटू श्याम मंदिर, भैसा कुंड, रिवरफ्रंट व भरवारा निकट इकाना स्टेडियम पर गोमती नदी के नमूनों की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि लॉकडाउन के दौरान जब सबकुछ बंद था। शहर ठहरा हुआ तो बीओडी के स्तर में तुलनात्मक कमी आई है। हां, मॉनीटरिंग स्थलों पर इसका स्तर अभी भी मानक के मुकाबले 4 से 6 गुना अधिक है लेकिन, जनवरी में इसका स्तर मानक सीमा के मुकाबले छह से 10 गुना अधिक था। शहीद स्मारक पर अपेक्षाकृत अधिक सुधार नहीं दिखा। वहीं, भैसाकुंड व भरवारा पर बीओडी का स्तर खराब स्थिति में मिला। उधर, मलजनित फीकल कॉलीफॉर्म जीवाणुओं की संख्या मानक के अनुसार 100 मिलीलीटर में 50 होनी चाहिए था। हालांकि इसकी तादाद सभी स्थलों पर अभी भी भयावह स्थिति में है। जनवरी के मुकाबले मई में इसकी संख्या में 40 से 50 फीसद की कमी आई है। टोटल कॉलीफॉर्म जीवाणुओं में 15 से 20 फीसद की तुलनात्मक कमी आंकी गई।

घुलित ऑक्सीजन में आया आंशिक सुधार

घुलित ऑक्सीजन के स्तर में भी आंशिक सुधार देखा गया। जनवरी और लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में इसका स्तर लगभग सभी स्थानों पर 6 मिलीग्राम की मानक सीमा से कम रहा। मई की पड़ताल में चार स्थानों शहीद स्मारक, भैसा कुंड, रिवरफ्रंट और भरवारा में आंशिक सुधार देखा गया। इन स्थानों पर डीओ 6.20 से 6.70 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा में पहुंच गया। पड़ताल में कुछ स्थानों पर गोमती में भारी धातुएं जैसे जिंक, कैडमियम, मैग्नीज, निकिल, लेड भी मामूली स्तर में मिली। हालांकि, टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (टीएसएस) की मात्रा कई स्थानों पर अधिक पाई गई।

ड्रोन से लिए गए नमूने

आइआइटीआर के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन बताते हैं कि जनवरी में जल नमूने वैज्ञानिकों ने कलेक्ट किए गए थे। अप्रैल और मई में लॉकडाउन था इसलिए हमने ड्रोन का प्रयोग करके गोमती के जल नमूनों को एकत्र किया। इसका एक फायदा यह रहा कि हम फिक्स स्थान से नमूने संग्रह कर सके। लॉकडाउन के दौरान गोमती की यह रिपोर्ट पर्यावरण दिवस पर जारी की जाएगी।

गोमती को नहीं मांगना पड़ा पानी

हर साल मार्च में ही गोमती का जलस्तर बहुत कम होने लगता था। इसके चलते जलकल विभाग को जलापूॢत के लिए सिंचाई विभाग से पानी उधार मांगना पड़ता था। इस बार अच्छी बात यह रही कि गोमती को उधार का पानी नहीं मांगना पड़ा। जलकल विभाग के महाप्रबंधक एसके वर्मा बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान गोमती का जलस्तर जहां 346.8 फीट बना रहा। वहीं, जल की गुणवत्ता भी अपेक्षाकृत अच्छी रही। 

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