लखनऊ, जागरण संवाददाता। केजीएमयू के पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स और यूपी आर्थोपेडिक्स एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को वर्ल्ड पीडियाट्रिक बोन एंड ज्वाइंट दिवस मनाया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों को हड्डी रोगों से बचाने के लिए हफ्ते में कम से कम पांच बार फिजिकल एक्टिविटी यानि शारीरिक सक्रियता जैसे खेलकूद, दौड़, कबड्डी, कुश्ती, क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबाल जैसे कार्यों में भाग लेना जरूरी है। इसके साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों को मोटापे से भी बचाना होगा। क्योंकि ज्यादातर हड्डियों के कमजोर व टेंढ़ी-मेढ़ी होने की वजह मोटापा ही है। 

केजीएमयू में पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक विभाग के डा. अजय सिंह ने कहा कि मोटापे की समय-समय पर स्क्रीनिंग और बचाव के उपाय अपनाते रहना अनिवार्य है। अभिभावकों को अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके बचपन से ही सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को भौतिक खेलों में भाग लेने के लिए उन्हें प्रेरित करें। तीन से पांच साल तक के बच्चे औरक छह से 17 वर्ष तक के बच्चों को कम से कम एक घंटा मांशपेशियों को मजबूत बनाने वाले क्रियाक्लाप करने चाहिए। इसमें क्लाइंबिंग, पुशअप, भागदौड़ समेत कोई सक्रिय खेल इत्यादि कुछ भी हो सकता है। इसे रोजाना 60 मिनट तक कराएं या हफ्ते में दो से पांच बार तक। 

खानपान पर ध्यान: इसके साथ ही उनके पौष्टिक खान-पान का ध्यान भी रखें। मजबूत हड्डी के लिए बच्चों को कैल्शियम युक्त खुराक अवश्य दें। राजमा-सीसेम इत्यादि में अच्छी मात्रा में कैल्शियम मिल जाता है।

इसे न दें: कोल्ड ड्रिंक, सोडा और अन्य पैकेज्ड ड्रिंक, जंक फूड व फास्ड फू़ड बच्चों को देने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। कैल्शिय और विटामिन डी की पूर्ति के लिए दूध अच्छा आहार है।

ऑनलाइन क्लास में 90 डिग्री पर रहे नजर: डा. अजय सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन क्लास लेते समय 90 डिग्री के फॉर्मूले पर ध्यान देना चाहिए। यानि बच्चे कुर्सी पर 90 डिग्री कोण पर बैठें। ताकि कमर व पैर से लेकर गर्दन तक सीधी रहे। इससे हड़्डियां सीधी रहेंगी। उनका विकास भी प्रभावित नहीं होगा। इस दौरान डा. सुरेश और डा. फैजल ने भी अभिभावकों को जागरूक किया। यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार व केजीएमयू के सीएमएस डा. एसएन शंखवार भी मौजूद रहे।

Edited By: Vikas Mishra