अयोध्या, संवादसूत्र। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में आयोजित बैठक के दौरान कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने एलएलबी पंचवर्षीय एवं त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश व इसमें आने वाली कठिनाइयों को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने लॉ कॉलेजों के प्राचार्यों, प्रबंधकों एवं विभागाध्यक्षों से संवाद किया। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसी भी कोर्स में छात्र-छात्राओं का प्रवेश बिना विश्वविद्यालय में ऑनलाइन पंजीकरण के नहीं हो सकेगा। अब इसमें विधि पाठ्यक्रम को भी शामिल किया गया है।

बैठक में तय हुआ कि नियमित कालेजों की फीस एक समान होगी। काउंसिलिंग के समय छात्र-छात्राओं की फीस विवि में ही जमा कराई जाएगी। इसके बाद ही महाविद्यालय आवंटित किया जाएगा। स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं के लिए एक समान फीस का निर्धारण किया जाएगा। इन महाविद्यालयों की फीस अलग-अलग न होकर समान होगी। फीस का निर्धारण तथा सीट संख्या के संबंध में निर्णय के लिए दो कमेटियों का गठन शीघ्र ही किया जाएगा। बैठक में प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रवेश समिति सदस्य प्रो. शैलेंद्र कुमार, डॉ. अनिल कुमार यादव, डॉ.. डीएन वर्मा, प्रोग्रामर रवि मालवीय, राजीव कुमार, संकायाध्यक्ष विधि डॉ. एके राय, प्राचार्य डॉ. अभय कुमार सिंह सहित अन्य कॉलेज के प्राचार्य मौजूद रहे।

अविवि में एक अधिकारी के जिम्मे कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक का कामकाज : डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में एक अधिकारी के पास दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी होने से कामकाज पर प्रभाव पड़ रहा है। कुलसचिव उमानाथ के पास कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक दोनों की जिम्मेदारी है। दोनों अहम जिम्मेदारियां एक ही अधिकारी के पास तकरीबन वर्ष भर से हैं। एक अधिकारी पर छह सौ महाविद्यालयों के प्रशासनिक व परीक्षा संबंधी कार्य का जिम्मा है। इससे कामकाज में प्रवाह नजर नहीं आ रहा है। एक ही अधिकारी के पास काम की अधिकता होने से न तो समय से परीक्षाएं हो रही हैं और न ही प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से हो पा रहा है। पत्रावलियां लंबे समय से एक ही पटल पर डंप हैं, लेेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार के चार पदों के सापेक्ष एक तथा सहायक कुलसचिव के चार पदों के सापेक्ष दो पर ही अधिकारियों की तैनाती है। सहायक कुलसचिव के दो व डिप्टी रजिस्ट्रार के तीन पद रिक्त है। इस कारण भी एक अधिकारी पर कार्य का अधिक दबाव है।

कामकाज का नियत चार्टर लागू नहीं : अवध विवि में पत्रावलियों के निस्तारण की समय सीमा तय नहीं है। एक- एक पत्रावली महीनों से लंबित हैं। मार्कशीट, डिग्री व अन्य कार्य के लिए कोई सारिणी तय नहीं है। महाविद्यालयों के कामकाज संबंधी नियम भी तय नहीं हैं। यदि नियम तय किए गये हैं, तो उनके अनुपालन व मॉनीटरिंग की व्यवस्था नहीं है। 

Edited By: Mahendra Pandey