लखनऊ (जेएनएन)। नोटबंदी के बाद घर से दूर रहकर पढऩे वाले छात्रों ने दोस्ती के पासवर्ड से नोटबंदी की मुसीबत का ताला खोलने की जुगत लगा ली है। यहीं नहीं 500 के पुराने नोट नकल पर्ची बनाने में प्रयोग कर रहे हैं। बुलंदशहर के खुर्जा में तो एक पिता ने अपनी बेटी की शादी में शगुन का लिफाफा लेने से मना कर दिया और साथ में शगुन बेटी के खाते में डालने के लिए उसका खाता नंबर छपवा दिया। यह कुछ बानगी हैं लेकिन नोटबंदी से उबरने के लिए बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले नहीं हुआ।

500 के पुराने नोट पर नकल की पर्ची

आज डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा में एक छात्र 500 के पुराने नोट को नकल की पर्ची बनाकर लाया था। बीटेक प्रथम वर्ष के इस छात्र ने इन नोट में प्रश्नों के उत्तर बड़ी बारीकी से लिखे थे। उसके पास कई 500 के नोट पकड़े गए जिन पर नकल लिखी हुई थी। एकेटीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेपी पांडेय ने बताया कि बीटेक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में अलीगढ़ के शिवदान सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में 500 के पुराने नोट पर नकल लिखकर लाए छात्र को पकड़ा गया। फिलहाल इन नोट को नकल की पर्ची के साक्ष्य के तौर पर कापी में नत्थी कर दिया गया है। एकेटीयू की सख्ती के कारण आगरा, अलीगढ़ व गाजियाबाद सहित कई जिलों में करीब 13 नकलची पकड़े गए। डॉ. जेपी पांडेय ने बताया कि सेमेस्टर परीक्षाओं का परिणाम जल्द घोषित हो इसके लिए परीक्षा की कापियों की कोडिंग का काम भी शुक्रवार से शुरू कर दिया जाएगा।

दोस्ती के पासवर्ड से खोला नोटबंदी का ताला

समस्याओं की जड़ तक जाकर उसे सुलझाने की हरसंभव कोशिश करने वाले इंजीनियर बनने की इच्छा लेकर घर से कोसों दूर रहकर कोचिंग में पढऩे वाले छात्रों ने दोस्ती के पासवर्ड से नोटबंदी की मुसीबत का ताला खोल लिया। इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे इन स्टूडेंट्स ने पढ़ाई से लेकर मौजमस्ती तक के खर्च में कोई परेशानी न हो, इसका फार्मूला निकाल लिया। उनका फार्मूला सफल रहा। वह बिना बाधा के पढ़ाई कर रहे और उनकी मस्ती में भी कोई रुकावट नहीं आई। कानपुर काकादेव के एक कोचिंग संस्थान से तैयारी कर रहे सात छात्र और दो छात्राओं ने नोटबंदी के संकट से बचने के लिए अपना ग्रुप बना लिया। ये सभी कानपुर से बाहर के हैं और दो हास्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। नकदी संकट के कारण इन्हें दिन या रात जब भी एटीएम खुले, पैसा निकालने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता था। उन्हें रोजमर्रा में पढ़ाई में आ रहे खर्च भी उठाने थे और मेस का पैसा भी देना था। ऐसे में बार बार एटीएम की लाइन उनकी पढ़ाई में बाधा बन रही थी। ऐसे में सभी ने रास्ता निकाला। कोचिंग में एक ग्रुप की तरह रहने वाले इन सभी स्टूडेंट्स ने सबसे पहले अपने एटीएम कार्ड का पासवर्ड एक जैसा कर लिया। इसके बाद दो-दो स्टूडेंट्स ने एटीएम से पैसा निकालने का जिम्मा उठाया।

एटीएम पर लाइन और पढ़ाई का हर्जा नहीं

दो स्टूडेंट्स एटीएम में गए और 18 हजार (काकादेव के अधिकतर एटीएम में दो हजार रुपये के नोट ही पड़े हैं) निकाल लाए। एक दिन पांच स्टूडेंट्स ने अपने मेस का खर्च दिया और दूसरे खर्च के लिए पैसा साझा कर लिया। अगले दिन दूसरे दो स्टूडेंट गए और लाइन में लगकर पैसा निकाल लिया। इससे बाकी का मेस का खर्च और स्टेशनरी का खर्च चलाया गया। बुधवार रात करीब पौने एक बजे एचडीएफसी के एटीएम से इन कार्डों से पैसा निकाल रहे महेश चौधरी ने बताया कि पहले सभी लाइन में लगते थे और पढ़ाई का हर्जा हो रहा था। रोज लाइन में लग रहे थे। ऐसे में हम दोस्तों ने यह रास्ता निकाला। पांच दिनों में हमने कुल 54 हजार रुपये निकाले। सभी के मेस का पैसा दिया जा चुका है। सभी के पास तीन-तीन हजार रुपये अन्य खर्च के हैं। एक दिन में केवल दो लोग लाइन में लगे और बाकी पढ़ते रहे। फिर अगले हफ्ते कुछ पैसों की जरूरत होगी तो ऐसे ही निकाल लेंगे।

लिफाफा नहीं, खाते में डालिए शगुन

नोटबंदी के चलते शादी वाले घरों में हो रही परेशानी से निजात पाने के लिए शहर के एक व्यापारी ने नायाब तरीका अख्तियार किया है। प्रधानमंत्री की कैशलेस मुहिम पर चलते हुए व्यापारी ने अपनी बेटी की शादी में शगुन का लिफाफा न लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कार्ड पर बेटी के बैंक का खाता संख्या छपवाकर शगुन इसमें डालने की अपील की है। इससे इतर शादी संबंधी सभी कामकाज में होने वाले खर्च का चेक से ही भुगतान किया जा रहा है। बुलंदशहर खुर्जा के वैशाली कालोनी निवासी व्यापारी डीसी गुप्ता की बेटी खुशबू का आगामी 12 दिसबंर को गाजियाबाद के एक होटल में शादी समारोह है। उन्होंने शादी समारोह में शगुन के रूप में लिफाफों में आने वाली नकद राशि न लेने का निर्णय लिया। इसके तहत उन्होंने शादी के कार्ड पर अपनी बिटिया का खाता नंबर अंकित कराया है। शगुन के रुपये को लिफाफे में न देकर खाते में डलवाने की अपील की गई है। इस अपील के बाद उनकी बेटी के खाते में लोगों ने शगुन जमा कराना भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा उनके द्वारा खरीदारी से लेकर मैरिज होम, बैंडबाजे आदि सभी खर्चे चेक के माध्यम से किए जा रहे हैं।

Posted By: Nawal Mishra