लखनऊ, जेएनएन। 'प्रियंका नहीं यह आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है...।' नए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने को यह नारा भले ही ठीक लगता हो लेकिन, वास्तविकता में दादी और पोती में निष्ठा रखने वालों के बीच गहरी खाईं पड़ चुकी है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की टीम में रहे कांग्रेसी आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और लामबंद हो गए हैं। ऐसे प्रदेश भर के असंतुष्ट वरिष्ठ कांग्रेसियों की गुरुवार को बैठक भी होने जा रही है।

प्रदेश में कांग्रेस के कायाकल्प के नाम पर पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा ने संगठन का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसियों को एक सिरे से किनारे कर संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसे लेकर वरिष्ठ कांग्रेसियों में नाराजगी तो कई दिन से है लेकिन, खुलकर चुनिंदा नेताओं ने ही आपत्ति जताई। मगर, धीरे-धीरे वह असंतोष अब काफी बढ़ चुका है।

पिछले महीने पूर्व एमएलसी सिराज मेंहदी के घर पर 10-15 पुराने कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। उसमें तय किया गया कि ऐसे प्रदेश भर के नेताओं के साथ बैठक की जाए, जो अब हाशिये पर डाल दिए गए हैं। लिहाजा, प्रदेश भर के असंतुष्ट वरिष्ठ कांग्रेसियों की बैठक गुरुवार को आजमगढ़ के पूर्व सांसद डॉ. संतोष सिंह के विश्वास खंड, गोमती नगर स्थित घर पर दोपहर 12 बजे से होने जा रही है।

पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्र ने बताया कि इस बैठक में ऐसे करीब 50 कांग्रेसी शामिल हो रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की टीम में रहे हैं। 40-50 वर्ष से कांग्रेस का झंडा-बैनर उठाकर मेहनत कर रहे हैं। पूर्व विधायक का कहना है कि हम सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन से असंतुष्ट हैं, क्योंकि इसमें वरिष्ठ कार्यकर्ता किनारे कर दिए गए। इसके अलावा अब संगठन में हमारी कोई सलाह भी नहीं मानी जा रही है। उनका कहना है कि हमें पार्टी से कुछ चाहिए नहीं लेकिन, निरादर न हो। हम कांग्रेसी हैं और कांग्रेसी ही रहेंगे। पार्टी का भला चाहते हैं।

हाईकमान तक दर्द पहुंचाने का है प्रयास

इस बैठक में चर्चा की जाएगी कि ऐसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को क्या कदम उठाना चाहिए। यहां जिन भी बातों पर सहमति बनेगी, उन्हें हाईकमान तक पहुंचाने के लिए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से समय मांगा जाएगा। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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