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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

100 पेड़ काट दिए 5 करोड़ खर्च किए अब प्रोजेक्ट बंद

By amal chowdhuryEdited By:
Published: Sun, 06 Aug 2017 08:58 AM (IST)

वेलोड्रम बनाने का प्रोजेक्ट अखिलेश सरकार में तैयार किया गया था, उस समय बताया गया कि इसके बनने के बाद लखनऊ को साइकलिंग की बड़ी प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिल सकेगी।

100 पेड़ काट दिए 5 करोड़ खर्च किए अब प्रोजेक्ट बंद
100 पेड़ काट दिए 5 करोड़ खर्च किए अब प्रोजेक्ट बंद

लखनऊ (भाष्कर सिंह)। सत्ता परिवर्तन होते ही नए हुक्मरानों की नजर में चढ़ने के लिए ऐसे फैसले लेती है, जिनका कोई तर्क नहीं होता। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद ऐसा ही कुछ गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में वेलोड्रम प्रोजेक्ट के साथ हुआ। 167.9 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को अफसरों ने बेकार घोषित कर दिया, वह भी 100 से ज्यादा बड़े पेड़ों की बलि लेने और पांच करोड़ रुपये फूंकने के बाद।

देश का दूसरा अंतरराष्ट्रीय वेलोड्रम बनाने का प्रोजेक्ट अखिलेश सरकार में तैयार किया गया था। उस समय बताया गया कि इसके बन जाने के बाद लखनऊ को साइकलिंग की बड़ी प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिल सकेगी। राज्य निर्माण एजेंसी को इसे बनाने की जिम्मेदारी दी गई।

पांच करोड़ रुपये जारी कर दिए गए और 2016 के अंत में काम शुरू हो गया। विधानसभा चुनाव के बाद अप्रैल में निर्माण एजेंसी ने प्रोजेक्ट के लिए अगले चरण का बजट मांगा तो 17 मई 2017 को प्रमुख सचिव खेल के हवाले से खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह का पत्र आया कि अब प्रोजेक्ट की कोई जरूरत नहीं है, काम बंद कर दो।

इसके बाद प्रोजेक्ट मैनेजर अनुराग खरे ने शासन को बताया कि पांच करोड़ के खर्च के साथ 100 बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं, ऐसे में प्रोजेक्ट को किसी अन्य रूप में लागू किया जा सकता है। मगर काम की इजाजत नहीं दी गई।

क्या है वेलोड्रम: साइकलिंग के लिए अंडाकार इंडोर ट्रैक को वेलोड्रम कहा जाता है। इसमें 180 डिग्री पर घुमाव होता है। इसके साथ दो सीधे ट्रैक होते हैं, इसमें छोटी दूरी की रेसों के लिए हल्की साइकिलों का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी: प्रोजेक्ट मैनेजर अनुराग खरे कहते हैं, हमें वेलोड्रम बनाने का काम दिया गया था। हमने सभी जरूरी इजाजत लेने के बाद काम शुरू किया। 17 मई को शासन से आदेश मिला कि प्रोजेक्ट की उपयोगिता नहीं है, इसलिए काम बंद कर दीजिए।

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नवंबर 2016 में लिया फैसला, मई 2017 में दी जानकारी: आरपी सिंह की ओर से भेज गए पत्र में चार नवंबर 2016 की शासन स्तर की बैठक में फैसला लेने का जिक्र था। सूत्रों का दावा है कि अफसरों ने जानबूझकर चुनावों का इंतजार किया। जब भाजपा सरकार आई और उसने शहरों में बने साइकिल ट्रैक तोड़ने की बात कही तो शीर्ष स्तर पर पिछली तारीख का आदेश तैयार किया गया। इसी वजह से जब नए बजट की तैयारी शुरू हुई तो 17 मई को पत्र भेजकर काम बंद करवा दिया गया।

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