लखनऊ, [हितेश सिंह]। संजू सैमसन की नाबाद 86 रनों की धाकड़ बल्लेबाजी के बाद भी भारत को लचर क्षेत्ररक्षण और खराब बल्लेबाजी की शुरुआत ने इकाना में अपने पहले वनडे मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका की टीम ने यह मुकाबला दस रन से जीत लिया। लखनऊ में लगातार दो दिनों से बरसात होने से भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला वनडे मैच होने पर संशय था, पर दो घंटे 15 मिनट बाद अंपायर ने जैसे ही टास कराया तो बीस दिनों से टिकट खरीद कर बैठे दर्शकों के चेहरे खिल उठे।

बारिश की वजह से 40 ओवर के इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने हेनरिक क्लासेन के नाबाद 74 और डेविड मिलर के नाबाद 75 के बीच 139 रन की शतकीय साझेदारी की मदद से बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 40 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 249 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम निर्धारित ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 240 रन ही बना सकी।

मेहमान टीम के बड़े स्कोर तक पहुंचने का एक कारण लचर क्षेत्ररक्षण भी रहा, जिसके चलते डेथ ओवरों में डेविड मिलर को न सिर्फ तीन जीवनदान मिले बल्कि जमकर रन भी लुटाए गए। पारी के 37वें ओवर में मोहम्मद सिराज की गेंद पर ऋतुराज गायकवाड़ ने मिलर का कैच टपकाया जबकि अगले ओवर में आवेश खान की दो लगातार गेदों पर पहले मोहम्मद सिराज और फिर रवि बिश्नोई ने आसान से कैच गिराकर रही सही कसर पूरी कर दी।

मिलर और क्लासेन की जोड़ी ने भारत के लचर क्षेत्ररक्षण का भरपूर फायदा उठाया और पांचवें विकेट के लिए उपयोगी 139 रन जोड़े। मिलर ने अपनी अर्धशतकीय पारी के दौरान 63 गेंदों में पांच चौके और तीन छक्के जड़े। वहीं, दूसरे छोर पर क्लासेन ने छह चौके और दो छक्के जमाए। भारत की ओर से शार्दुल ठाकुर 35 रन देकर दो विकेट चटका कर सबसे असरदार साबित हुए, जबकि रवि बिश्नोई 69 रन पर एक विकेट चटका कर सबसे महंगे साबित हुए। कुलदीप यादव ने 39 रन देकर एक विकेट हासिल किया।

एक समय दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 22.2 ओवर में चार विकेट पर 110 रन था। क्विंटन डीकाक 49 का विकेट गिरने के बाद क्रीज पर आए मिलर ने रनगति को तेज किया और क्लासेन के साथ महज 17.4 ओवरों में 7.86 रन प्रति ओवर की गति से टीम के स्कोर को चुनौतीपूर्ण बनाया। इससे पहले, खराब मौसम के कारण मैच निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से शुरू हुआ और ओवरों की संख्या घटाकर 40-40 कर दी गयी। कप्तान शिखर धवन ने टास जीतकर मेहमान टीम को पहले बल्लेबाजी करने का न्योता दिया।

टी-20 वर्ल्ड कप में चोटिल जसप्रीत बुमराह के स्थान पर भारतीय टीम में जगह बनाने से चूके मोहम्मद सिराज ने आवेश खान के साथ गेंदबाजी आक्रमण की शुरुआत की और पिच में व्याप्त नमी का पूरा फायदा उठाते हुए दक्षिण अफ्रीका के ओपनर जानेमन मलान और क्विंटन डीकाक को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। दोनों गेंदबाजों की खतरनाक स्विंग से मेहमान खिलाड़ी कई मौकों पर असहज नजर आए।

मैच के दसवें ओवर में कप्तान धवन ने अपना पदार्पण वनडे मैच खेल रहे फिरकी गेंदबाज रवि बिश्नोई को गेंद थमाई, मगर बिश्नोई अनुभवी जोड़ी के सामने शुरुआती ओवरों में बेअसर साबित हुए। दूसरे छोर पर शार्दुल ठाकुर की गेंदो से बल्लेबाज परेशानी में रहे और 13वें ओवर की पहली गेंद पर शार्दुल को 22 रन पर खेल रहे मलान के तौर पर पहली सफलता मिली। मलान का कैच मिड विकेट पर खड़े श्रेयस अय्यर ने लपका। दक्षिण अफ्रीका ने अपने 50 रन 78 गेंदें खेलकर पूरे किए जबकि 100 रन 20.4 ओवर के खेल में पूरे किए।

टेम्बा बावुमा का संघर्ष इस टूर में भी जारी

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा का संघर्ष मौजूदा टूर में वनडे सीरीज में भी जारी रहा और वह एक बार फिर दहाई के निजी स्कोर तक पहुंचने में नाकाम रहे। बावुमा को आठ रन के निजी स्कोर पर शार्दुल ने क्लीन बोल्ड करके पवेलियन वापस पहुंचाया। खर्चीले साबित हो रहे बिश्नोई के स्थान पर धवन ने लोकल ब्वाय कुलदीप को गेंद थमाई जिन्होंने अपने पहले ही ओवर में नए बल्लेबाज एडेन मार्कराम को शून्य पर आउट कर मेहमान टीम को एक और झटका दिया।

वनडे इंटरनेशनल में बिश्नोई को पहला विकेट

एक छोर पर भारतीय खेमे के लिए खतरनाक साबित हो रहे डिकाक को रवि बिश्नोई ने अपने दूसरे स्पेल में पगबाधा आउट किया। मेहमान ओपनर ने बिश्नोई की गेंद को रिवर्स स्वीप करने का प्रयास किया मगर गेंद उनके पैड से टकरा गई। डिकाक ने मैदानी अंपायर के फैसले को चुनौती देते हुए डीआरएस लिया मगर परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया। वनडे इंटरनेशनल करियर में बिश्नोई का यह पहला विकेट था।

पहले टेस्ट के बाद अब पहला वनडे भी लखनऊ में हारे 

टीम इंडिया के लिए लखनऊ में पहला टेस्ट और अब पहला वनडे शुभ नहीं रहा। यहां 1952 में पहली बार टेस्ट मैच खेला गया था, तब भी टीम इंडिया पाकिस्तान से पारी के अंतर से मैच हारी थी। उसके बाद गुरुवार को पहली बार टीम यहां वनडे खेलने उतरी तो उसे दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

Edited By: Vrinda Srivastava

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