लखनऊ, जेएनएन। केजीएमयू में जल्द ही वीडियो लैङ्क्षरगोस्कोप खरीदा जाएगा। इसके जरिए ओटी में एनेस्थीसिया के वक्त ऑक्सीजन ट्यूब डालाना आसान होगा। ऐसे में मुंह में ट्यूमर व मांस अधिक होने पर ऑक्सीजन ट्यूब आसानी से डाली जा सकेगी। केजीएमयू के शताब्दी फेज-टू में शनिवार को पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया पर कार्यशाला हुई। इस दौरान ब'चों में ऑपरेशन में प्री व प्रोस्ट मैनेजमेंट पर एनेस्थेटिस्ट व पीडियाट्रिक सर्जन ने चर्चा की।

डॉ. तन्मय तिवारी ने कहा कि ब'चों के मुंह में जगह कम होती है। वहीं सांस नली भी छोटी होती है। इसके अलावा कई ब'चों में जन्मजात मुंह में बढ़ा मांस व ट्यूमर होता है। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन के लिए मुंह से इंडोट्रैकियल ट्यूब डालना कठिन होता है। यहां तक कि फाइबर ऑप्टिक ब्रांकोस्कोप से भी सटीक ट््यूब डालने में मुश्किलें आती हैं। इस दौरान ब'चे की सांस नली में इंजरी होने का खतरा रहता है। शीघ्र ही विभाग में वीडियो लैरेंगोस्कोप खरीदा जाएगा। इसका टेंडर जारी हो चुका है। वीडियो लैङ्क्षरगोस्कोप में हैंड होल्ड स्क्रीन होती है। इसमें देखकर सांस नली में आसानी से ट्यूब डाली जा सकेगी।

सर्दी-जुकाम में बच्चों का न करें ऑपरेशन : डॉ. प्रेम राज सिंह ने कहा कि सर्दी, जुकाम, बुखार में ब'चे का ऑपरेशन नहीं करना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा ब'चों के ऑपरेशन के पूर्व आवश्यक जांचें ही कराएं, ताकि उसे बेवजह के रेडिएशन से बचाया जा सके। कार्यशाला में डॉ. जीपी सिंह, बीएचयू से डॉ. पुष्कर, डॉ. अपूर्व अग्रवाल, डॉ. मृदुल, डॉ. जेडीरावत समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे।

 

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