लखनऊ, जेएनएन। समय के साथ शादी के आयोजन को लेकर बदलाव का दौर शुरू हो गया है। रात्रि में सात फेरे के बजाय अब दिन में ही फेरे लेकर युवक-युवतियां शादी के बंधन में बंध रहे हैं। सिख समाज की भांति दिन में शादी करने का क्रेज बढ़ने से अब लोग इसमें फायदा भी देखने लगे हैं। दिन में सजावट के अतिरिक्त इंतजाम भी नहीं करने होते और बिजली की बचत होती है। इस महीने की 28 और अगले महीने की पांच तारीख को शहर में शादियों की धूम होगी और कई शादियां दिन में भी होंगी।

गोमती नगर निवासी गोपाल शर्मा के यहां कुछ रोज पहले दिन में शादी हुई। उनका कहना है कि घरवाले और रिश्तेदारों ने कहा तो मैंने भी मान लिया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शादी दिन में हो या रात में, बस रस्में पूरी होनी चाहिए। बेटे की शादी करने जा रहे रवि कुमार अरोड़ा ने बताया कि दिन में बेटे की शादी की तैयारियां पूरी हो गई हैं। उनका कहना है कि दिन में शादी करने से बिजली की सबसे ज्यादा बचत होती है। ब्यूटीशियन निशा ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ ऐसी शादियों का क्रेज बढ़ जाता है।

फरवरी में कई शादियां दिन में हैं। दिन में मेकअप करने में थोड़ा ज्यादा मेहनत करनी होती है जबकि रात्रि में मेकअप को लाइट के अनुसार करना पड़ता है। दिन में हल्के मेकअप के साथ ही दुल्हन को सजाने में काफी ध्यान रखना पड़ता है। इंदिरानगर के मानस इंक्लेव की सिद्धि जायसवाल का कहना है कि दिन में शादियों का क्रेज पिछले दो से तीन वर्षो में बढ़ा है।

दिन की शादी में दुल्हन की पोशाक को बनाने में डार्क रंग का प्रयोग किया जाता है, जिससे उसका लुक और निखरता है। अशोक मार्ग स्थित बैंड मास्टर गौरव का कहना है कि 10 फीसद शादियां दिन में होने लगी हैं। इससे फायदा यह है कि शाम की दूसरी बुकिंग भी कर सकते हैं। 

Posted By: Anurag Gupta

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