लखनऊ। जरा सी लापरवाही किस कदर बात बिगाड़ देती है, आजमगढ़ के महराजगंज की घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है। हालांकि प्रशासन ने बाद में जिस तरीके से मामले को संभाला वह भी कम काबिलेतारीफ नहीं है। फिर भी जो हुआ वह बहुत नुकसान कर गया। हाल यह रहा कि थाने के पुलिसकर्मियों के तन पर वर्दी के अलावा कोई सामान नहीं बचा। महराजगंज थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव निवासी अधिवक्ता व प्रधान ङ्क्षसहासन यादव अपने राजनीतिक व सामाजिक सेवाओं के लिए इलाके में लोकप्रिय थे। इसी का नतीजा था कि उनको गोली लगने की सूचना पर आस-पास के कई गांवों के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने ङ्क्षसहासन यादव के शव को कब्जे में ले लिया था लेकिन ग्रामीणों के आक्रोश के आगे उसकी एक न चली। आक्रोशित भीड़ का शिकार पूरा महराजगंज थाना हो गया। यहां तक बैरकों में रहने वाले सिपाहियों की चारपाई, संदूक, थानाध्यक्ष कार्यालय का अभिलेखगार, दर्जनों राइफलें, बंदियों के बिस्तर, जनरेटर सहित कई दर्जन बाइक व चार पहिया वाहन भी आग के हवाले कर दिए गए। हाल यह कि घटना के बाद पुलिसकर्मियों के भोजन की व्यवस्था भी पुलिस लाइन से की गई। इस घटना से हर कोई हैरत में हैं। पुलिस अधिकारियों से लेकर पूरा क्षेत्र सहमा हुआ है।

पुलिस के हाथ खाली-अधिवक्ता हत्याकांड में पुलिस ने दो सगे भाइयों समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। प्राथमिकी अधिवक्ता के भाई की तहरीर पर दर्ज की गई है। हालांकि पुलिस के हाथ दूसरे दिन भी खाली ही रहे। किसी की गिरफ्तारी न होने से लोगों में आक्रोश है। उधर पुलिस का कहना है कि जांच कई बिंदुओं पर चल रही है। उसमें संपत्ति विवाद से लेकर राजनीतिक कारणों को भी खंगाला जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दबिश जारी है। दूसरी ओर हत्या के विरोध में पूर्वांचल के जिलों में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

Posted By: Nawal Mishra

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