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नोएडा के श्रमिक आंदोलन की आग पर सुलगने लगी यूपी की सियासत, सरकार पर सवाल खड़े कर चुनावी समीकरण साधने में जुटे विपक्षी दल

Published: Tue, 14 Apr 2026 07:41 PM (IST)

नोएडा में वेतन वृद्धि के लिए श्रमिक आंदोलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। विपक्षी दल इसे सरकार ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नोएडा श्रमिक आंदोलन ने यूपी में राजनीतिक हलचल बढ़ाई।

  2. विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

  3. सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 21% बढ़ाई।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर भड़की श्रमिक आंदोलन की आग पर अब सियासत सुलग रही हैं। विपक्षी दल, आक्रोश को हवा देकर सरकार को घेरने में जुटे हैं। उनकी रणनीति श्रमिक हितों के सरकारी दावों को कमजोर करने की है। इसके ही सहारे महंगाई, बेराेजगारी और पूंजीपतियों की मनमानी जैसे मुद्दों को भी खड़ा करने का प्रयास हो रहा है। ऐसे में सरकार के सामने श्रमिकों की नाराजगी दूर करने की चुनौती तो है ही, निवेशकों के भरोसे का संतुलन भी साधना है। फिलहाल न्यूनतम मजूदरी में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर हालत अनुकूल करने की कोशिश हो रही है, परंतु इस पर सियासत का सिलसिला लंबा चलने वाला है।

प्रदेश में सभी राजनीतिक दल वर्ष 2027 में होने वाले विधान सभा चुनाव के की तैयारी में जुटे हैं। भाजपा जातीय समीकरणों को साधने का ताना-बाना तो बुन ही रही है, अपनी सरकार के दो बार के कार्यकाल में निवेश और आद्योगिक विकास में बड़ी छलांग की तस्वीर भी पेश कर रही है। सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी, सेवा शर्तों में सुधार जैसे कदमों से राजनीतिक बढ़त बनाने की भी कोशिश कर रही है।

अब विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, नोएडा आंदोलन के सहारे सरकार की इसी रणनीति की धार कुंद करना चाहती है। लगातार भाजपा पर पूंजीपतियों के लिए काम करने, महंगाई-बेराेजागारी के मुद्दे उठा रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस प्रकरण को भी सरकार की एकतरफा नीति का परिणाम करार दिया हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी इसे लेकर योगी सरकार पर हमलावर हैं।

विपक्ष, जनता के बीच यह नैरेटिव बनाने में जुटा है कि महंगाई और वेतन असंतुलन ने श्रमिकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। जिससे भाजपा के विकास माडल को बहस का केंद्र बनाया जा सके। इस जोखिम से बचने को सरकार भी विपक्ष के आराेपों को खारिज करने में जुटी है।

औद्योगिक विकास मंंत्री नंद गोपाल नंदी ने सपा और कांग्रेस द्वारा आंदोलन को भड़काने की आशंका जताई। वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने आंदोलन के पीछे साजिश की शंका जताई है। इस सबके बीच सरकार ने प्रकरण में तत्परता दिखाकर विपक्ष को बढ़त लेने से रोकने की कोशिश की है। प्रकरण में उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर नाेएडा भेजी गई और उसके बाद बड़ा कदम उठाते हुए मजदूरी की दरों में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। अब सरकार इस संदेश को मजबूत करने में जुटी है कि उसने समय रहते हस्तक्षेप किया।

बहरहाल, श्रमिक वर्ग राजनीति के केंद्र में दिख रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में मौजूद प्रवासी श्रमिक इस पूरे समीकरण को और अहम बना देते हैं। यदि यह वर्ग किसी एक पक्ष के साथ लामबंद होता है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर असर दिख सकता है। यही कारण है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की कोशिश में जुट गए हैं।

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