लखनऊ, जेएनएन। समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का नामांकन-पत्र बुधवार को जमा होते ही राज्यसभा के लिए उनका पुन: निर्वाचित होना तय हो गया है। उपचुनाव के लिए बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह समेत प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में नीरज ने विधानभवन के सेंट्रल हाल में अपना पर्चा दाखिल किया।

नामांकन के बाद पत्रकारों से बातचीत में नीरज शेखर ने कहा कि चुनाव में जीत हार लगी रहती है, लेकिन समाजवादी पार्टी में सम्मान न मिलने की वजह से इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा ने सम्मान दिया है, इसलिए यहां आया। राष्ट्रवाद और समाजवाद दोनों गरीबों के लिए काम करता है। समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने मुझसे कभी बात ही नहीं की। देश में एक ही पार्टी भाजपा है जो राष्ट्र के लिए काम कर रही है। 

राज्यसभा की यह सीट नीरज द्वारा सपा छोडऩे के साथ इस्तीफा देने पर रिक्त हुई थी। इस सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन कराने को दोपहर 12 बजे से ही भाजपा मुख्यालय पर नेता जुटने लगे थे। लगभग एक बजे योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा नेता विधानभवन की ओर जुलूस की शक्ल में निकले और 1:20 बजे पार्टी के विधानमंडल दल कार्यालय में पहुंचे। ज्योतिष परामर्श के अनुसार दोपहर 1:30 बजे उन्होंने चार सेट में नामांकन कराया। नामांकन-पत्र की जांच 16 तरीख और नाम वापसी 19 अगस्त को होगी। इसी दिन निर्वाचन की औपचारिक घोषणा होगी।

ये रहे उपस्थित
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डाॅॅ. दिनेश शर्मा, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना, गोपाल टंडन, ब्रजेश पाठक, चेतन चौहान, डाॅॅ. महेंद्र सिंह, गिरीश यादव, बलदेव औलख, उपेंद्र तिवारी व विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह, राधामोहन दास अग्रवाल, सुरेश श्रीवास्तव, पंकज सिंह, दयाशंकर सिंह, विजय बहादुर पाठक और मनीष दीक्षित भी उपस्थित थे।

सपा के दो एलएलसी भी मौजूद रहे
नीरज शेखर के नामांकन में सपा के दो विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह 'पप्पू' व सीपी चंद की उपस्थिति चर्चा में रही। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की मृत्यु के बाद उपचुनाव में नीरज पहली बार लोकसभा सांसद बने। वर्ष 2009 में फिर जीते, मगर 2014 में मोदी लहर में हार गए। इसके बाद सपा ने उनको राज्यसभा भेज दिया, उनका कार्यकाल नवंबर 2020 तक था। वर्ष 2019 में वह लोकसभा चुनाव लडऩा चाहते थे, परंतु टिकट नहीं मिलने से नीरज सपा से नाराज थे।

 

नीरज शेखर का चुना जाना तय

भाजपा के बहुमत को देखते हुए नीरजा शेखर का उच्च सदन के लिए चुना जाना तय है। चुनावी गणित के हिसाब से प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार के सामने विपक्षी सदस्यों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में संभावना है कि इस सीट के लिए नीरज शेखर के अलावा कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं आएगा।

सपा से इस्तीफा देकर भाजपा में हुए शामिल 

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर अभी हाल ही में राज्यसभा और सपा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए हैं। नीरज शेखर लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े थे। लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा टिकट न दिए जाने से नाराज नीरज ने राज्यसभा से इस्तीफा देते हुए हाल ही में भाजपा ज्वाइन कर ली थी। उप चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश कोटे से नीरज शेखर को भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

नीरज शेखर की राजनीतिक यात्रा

पिता पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में जीतकर नीरज शेखर पहली बार सांसद में पहुंचे। वह 2009 के लोकसभा चुनाव फिर जीते और लोकसभा पहुंचे, लेकिन 2014 के मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।इसके बाद सपा ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। वर्ष 2019 में एक बार फिर वह लोकसभा चुनाव लड़कर पिता की विरासत को सहेजना चाहते थे, लेकिन पार्टी अध्यक्ष ने राज्यसभा सदस्य का हवाला देते हुए टिकट नहीं दिया। तभी से नीरज शेखर नाराज चल रहे थे। बात यह भी आई कि टिकट न मिलने से नाराज नीरज के समर्थकों ने चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार किया।

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Posted By: Umesh Tiwari