लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। किसानों को कम मेहनत में अधिक लाभ देने की सब्जी विकास योजना खटाई में पड़ गई है। सब्जी का उत्पादन कर शहरी क्षेत्र के लोगों को सस्ती और ताजा सब्जी उपलब्ध कराने की यह महत्वाकांक्षी योजना में करोड़ों खर्च तो किए गए, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ सकी। किसान भी अब सब्जी उत्पादन की इस योजना को लेकर अधिकारियों की उदासीनता से मायूस हैं।

माल विकास खंड के किसान रामसुमेर का केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भिंडी उत्पादन के लिए चयन किया गया। एक निजी संस्था की ओर से उन्हे उत्पादन का प्रशिक्षण भी दे दिया गया। उन्हें लगा कि अब उनकी माली हालत सुधर जाएगी, लेकिन कई वर्ष बीतने के बावजूद उन्हें सब्जी उत्पादन के लिए न तो बीज मिला और न ही खाद ही मिल पाई अब वह फिर से परंपरागत खेती करने लगे हैं। अकेले राम सुमेर ही नहीं लखनऊ के 300 किसानों को प्रशिक्षण के बाद सब्जी उत्पादन का इंतजार है।

माडल बनाने की थी योजना: केंद्र सरकार की यह योजना राजधानी समेत पूरे प्रदेश में लागू होनी थी। राजधानी को माडल के रूप में प्रस्तुत करने के लिए बख्शी का तालाब के 13 , गोसाईगंज के पांच, माल के चार, चिनहट के तीन, मोहनलालगंज के सात और काकोरी के आठ गांवों का सब्जी उत्पादन के लिए चयन किया गया। 300 किसानों को एक निजी संस्था की ओर से प्रशिक्षण भी दिया गया।

यह है योजना: केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 'नेशनल वेजीटेबल इन पेरी अरबन एरियाÓ परियोजना के लिए प्रदेश सरकार की ओर से छह करोड़ रुपये जिला उद्यान अधिकारी को दिए गए। अधिकारियों की लापरवाही से बैगन, भिंडी, शिमला मिर्च, प्याज, करेला व लौकी का उत्पादन नहीं हो सका।

सर्वेक्षण में खर्च किए छह लाख: सरकार की ओर से जारी किए गए छह करोड़ में पौने चार करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। उसमे सर्वेक्षण में छह लाख, किसानों को प्रोत्साहित करने में करीब एक लाख, शाकभाजी उत्पादन के लिए बीज व पालीहाउस बनाने में पौने तीन करोड़ और करीब चार करोड़ किसानों को प्रशिक्षण व सर्वेक्षण में खर्च किया गया। वर्तमान जिला उद्यान अधिकारी की ओर से पिछले वर्ष बजे करीब दो करोड़ भी वापस कर दिया गया। निदेशक डा.आरके तोमर ने बताया कि योजना के तहत किसानों का चयन किया गया है और उन्हें प्रशिक्षण देने का कार्य पूरा हो गया है। इस वर्ष योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा।

Edited By: Rafiya Naz