यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Mulayam Singh Yadav: मुस्लिम-यादव गठजोड़ कर चार बार उत्तर प्रदेश में बनाई सरकार, अखिलेश यादव को सौंपी विरासत
Mulayam Singh Yadav News छह दिसंबर 1992 को भाजपा सरकार में अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया। इस घटना ...और पढ़ें

UP News: लखनऊ [शोभित श्रीवास्तव]। अखाड़े में पहलवानी व शिक्षक की नौकरी करने के बाद राजनीति में आए मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को न सिर्फ अच्छे से समझते थे, बल्कि उन्होंने राजनीति में इसका सफल प्रयोग भी किया। प्रदेश की राजनीति में पिछड़ी जातियों व खासकर यादवों की गोलबंदी कर उन्होंने पांच दिसंबर, 1989 को पहली बार सरकार बनाई।
ऐसे बन गए मुसलमानों के बड़े नेता
अयोध्या आंदोलन के समय मुख्यमंत्री मुलायम ने चेतावनी दी थी कि 'बाबरी मस्जिद गिराना तो दूर, मस्जिद के आसपास परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।' मुलायम ने अपने इस वचन के पालन में विवादित ढांचे की ओर बढ़ रहे कारसेवकों पर 30 अक्टूबर व दो नवंबर, 1990 में गोलियां चलवा दी थीं। इसके बाद वे मुसलमानों के भी बड़े नेता बन गए। यहीं से उन्हें राजनीति में नया नाम 'मुल्ला मुलायम' भी मिला।
यादवों को गोलबंद करने में रहे कामयाब
वर्ष 1990 में जब मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू हुईं तो पिछड़ों की एकता और अगड़ी जातियों से उनके हिंसक विरोध का स्तर बढ़ा। इसी के साथ पिछड़ी जातियों के अपने-अपने नेतृत्व खड़े होने शुरू हो गए। इसी दौरान पिछड़ों में आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक रूप से मजबूत जाति यादव को प्रदेश में मुलायम सिंह यादव गोलबंद करने में कामयाब हो गए। अयोध्या में गोलीकांड के बाद मुलायम को मुस्लिमों का भी समर्थन मिल गया। हालांकि इसके बाद वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी हार गई।
नया चुनावी समीकरण मुस्लिम-यादव
मुलायम ने चार अक्टूबर, 1992 को अपना नया दल समाजवादी पार्टी के नाम से बनाया। छह दिसंबर, 1992 को कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया। इस घटना के बाद यूपी का मुस्लिम समाज, मुलायम सिंह और समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ गया और प्रदेश की राजनीति में एक नया चुनावी समीकरण मुस्लिम-यादव (एम-वाई) उभरकर आया। पार्टी बनाने के करीब एक वर्ष बाद 1993 में मुलायम ने कांशीराम के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा और बाद में छोटे दलों के समर्थन से सरकार बना ली।
सीएम की कुर्सी बेटे अखिलेश को सौंपी
करीब 20 प्रतिशत मुस्लिम व 12 प्रतिशत यादव मतदाताओं के गठजोड़ ने मुलायम को तीन बार मुख्यमंत्री की गद्दी पर बिठाया। चौथी बार मुलायम ने मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने बेटे अखिलेश को सौंप दी। सपा के मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ही उनके राज में प्रदेश में मुख्तार अंसारी व अतीक अहमद जैसे माफिया भी पनपे, लेकिन मुलायम ने कभी इसकी परवाह नहीं की। मुलायम राजनीति के एम-वाई गठजोड़ के साथ आगे बढ़ते चले गए।
