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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mulayam Singh Yadav: मुख्यमंत्री रहते यूपी में समाप्त की चुंगी की व्यवस्था, किसानों और शिक्षकों के रहे हितैषी

By Rajeev DixitEdited By: Umesh Tiwari
Published: Mon, 10 Oct 2022 06:56 PM (IST)

Mulayam Singh Yadav खुद अध्यापक रहे मुलायम सिंह यादव के दिल में शिक्षकों के लिए नर्म कोना था। अपने दूसरे ...और पढ़ें

Mulayam Singh Yadav: किसानों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भी हितैषी रहे मुलायम।
Mulayam Singh Yadav: किसानों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भी हितैषी रहे मुलायम।

UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। खांटी नेता रहे मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते किसानों, शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों के हित में कई निर्णय किए। इनमें से एक निर्णय प्रदेश में चुंगी की व्यवस्था समाप्त करने का था। यह फैसला मुलायम ने अकारण ही नहीं लिया था। खेतिहर परिवार में जन्मे मुलायम ने चुंगी की आड़ में किसानों के शोषण और उत्पीड़न को बहुत करीब से देखा था।

ऐसे लिया चुंगी व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय

अतीत के संस्मरणों की यादें ताजा करते हुए विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बताया कि युवावस्था में नेताजी (मुलायम सिंह यादव) एक बार चुंगी से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि विपन्नता के कारण चुंगी नही अदा कर पाने वाले किसान को कर्मचारी डंडे से पीट रहे थे। यह दृश्य उनके मानस पटल पर अंकित हो गया और मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में चुंगी व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लेकर किसानों को बड़ी राहत दी।

शिक्षकों के लिए हमेशा उदार रहे

खुद अध्यापक रहे मुलायम सिंह यादव के दिल में शिक्षकों के लिए भी नर्म कोना था। विधान परिषद सदस्य और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी और अवकाश प्राप्त माध्यमिक शिक्षक कल्याण एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि अपने दूसरे मुख्यमंत्रित्व काल में 20 जुलाई 1994 को सहायताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों को ट्रेजरी के माध्यम से पेंशन भुगतान का आदेश जारी कराकर उनकी समस्या का निदान कराया था। इतना ही नहीं, उन्होंने इस आदेश को पहली जनवरी 1986 से लागू कराया था।

शिक्षकों के हित में लिए कई निर्णय

वहीं तीसरी बार मुख्यमंत्री रहते उन्होंने सहायताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की अधिवर्षता आयु को 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का निर्णय किया था जिसका आदेश चार फरवरी 2004 को लागू हुआ था। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी बताते हैं कि वेतन आयोग की सिफारिशों को वर्ष 2004 में लागू करते समय नेताजी ने 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन में शामिल कराने का बड़ा निर्णय लिया।

संविदा कर्मियों के विनियमितिकरण का निर्णय

इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्रा कहते हैं कि मुलायम सरकार में ही वर्ष 1996 तक के संविदा कर्मियों के विनियमितिकरण का निर्णय लिया गया। लुआक्टा के पूर्व अध्यक्ष डा. मौलीन्दु मिश्र व उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री आरपी मिश्रा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव शिक्षकों व कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।

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