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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mulayam Singh Yadav: …जब छात्र आंदोलन में शामिल होने लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचे गए थे मुलायम सिंह यादव

By Jagran NewsEdited By: Vikas Mishra
Published: Mon, 10 Oct 2022 05:20 PM (IST)

Mulayam Singh Yadav पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हमेशा छात्र-छात्राओं के हित के लिए आगे रहते थे। एक बार लखनऊ ...और पढ़ें

Mulayam Singh Yadav: छात्र नेताओं के कहने पर नेताजी लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के बाहर आंदोलन में पहुंचे थे।
Mulayam Singh Yadav: छात्र नेताओं के कहने पर नेताजी लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के बाहर आंदोलन में पहुंचे थे।

लखनऊ, [अखिल सक्सेना]। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से होकर निकले छात्र नेताओं का पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से काफी लगाव रहा है। यही वजह है कि 17 सितंबर 1989 को हास्टल खाली कराए जाने के विरोध में हुए छात्र आंदोलन की सूचना पर नेताजी मुलायम सिंह यादव क्रांति रथ के साथ कुलपति कार्यालय के बाहर छात्रों के समर्थन में पहुंच गए थे। 

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डा. नीरज जैन बताते हैं कि 13 सितंबर 1989 को उस समय कुलपति रहे प्रो. हरिकृष्ण अवस्थी ने हास्टल खाली कराने का आदेश दे दिया था। इसके विरोध में सैकड़ों छात्र वीसी कार्यालय से लेकर उनके आवास तक कई दिन तक धरने पर बैठै रहे। 17 सितंबर 1989 को नेता जी मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी क्रांति रथ के साथ बाराबंकी से लखनऊ लौट रहे थे। उन्हें छात्रों के आंदोलन की सूचना मिली तो वह सीधे आंदोलन में क्रांतिरथ के साथ शाम को पहुंच गए और अपना समर्थन दिया। छात्रों ने उनके लिए खूबर नारे लगाए थे। 

नेता जी ने कभी निराश नहीं किया : पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप बताते हैं कि नेता जी ने कभी छात्रों या कार्यकर्ताओं को निराश नहीं किया। हास्टल के लिए हुए छात्र आंदोलन में वह सीधे कुलपति कार्यालय के बाहर पहुंचे थे। उन्होंने वीसी से कहा, ‘ये भी आपके बच्चे हैं, समस्या का समाधान करिए’। 10 मिनट बाद कुलपति ने छात्रों से कहा था, ‘नेता जी ने कितनी शालीनता से बात रखी, उनसे सीखो’ और मांगे मान ली। वह बताते हैं कि पहली बार लखनऊ विश्वविद्यालय में 1989 में छात्र संघ महामंत्री सपा के समर्थन से ही बना। बहुत से गरीब छात्रों की फीस भी नेताजी ने जमा करवाई।

शिक्षकों के लिए की थी घोषणाएं : डा. नीरज जैन बताते हैं कि छह अगस्त 1991 में बतौर मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव लखनऊ विश्वविद्यालय के डीपीए सभागार में नारी शक्ति संस्था के कार्यक्रम में आए थे। उप्र आवासीय विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के कार्यकारी महामंत्री डा. पुष्पेंद्र मिश्रा बताते हैं कि 1994 के कला संकाय प्रांगण में नेताजी ने शिक्षकों को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफसर पद पर व्यक्तिगत प्रोन्नति दी थी। उसके बाद 2004 में मालवीय सभागार में विश्वविद्यालय के अंशकालिक शिक्षकों का विनियमितीकरण करने घोषणा भी थी।

क्रिश्चियन कालेज में हुआ था सम्मान : पूर्व लुआक्टा अध्यक्ष डा. मौलीन्दु मिश्रा ने बताया कि छह जनवरी 2004 को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव क्रिश्चियन डिग्री कालेज अभिनंदन समारोह में आए थे। यहां उन्होंने डिग्री कालेज के शिक्षकों की अधिवर्षता आयु 60 से 62 वर्ष करने की सौगात दी थी। इसके अलावा अल्पसंख्यक महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सिर्फ कुलपति के अनुमोदन को ही मान्य करने की घोषणा भी की थी।