लखनऊ [रूमा सिन्हा]। ठंड के अहसास के साथ ही उत्तर प्रदेश से शुक्रवार को मानसून की विदाई हो गई। देश से उसकी रुख्सती में कुछ वक्त भले हो मगर, इस बार पूरे चौमासे उसका रुख भेदभाव से भरा दिखा। एक ओर बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र में जमकर कहर बरपाया तो उत्तर प्रदेश को उतना ही तरसाया भी। हालांकि, पूरे सीजन में पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा बुंदेलखंड पर बादलों की कुछ हद तक कृपा गरजती-बरसती रही मगर, मध्य व पश्चिमी उप्र बारिश रूपी नेमत कम ही उड़ेली।

यही कारण है, जल संकट से पहले ही जूझ रहे पश्चिमी उप्र में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया। कुल जमा हिसाब लगाएं तो 111 दिन की यात्रा के बावजूद 14.4 फीसद कम बरसात इस बार हुई। वहीं, बीते वर्ष के मुकाबले बादल 2.9 फीसद कम  बरसे। 

उत्तर प्रदेश में मानसून ने 22 जून को दस्तक दी थी। अनुमान अच्छी बारिश के लगाए गए थे लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। प्रदेश में सामान्य रूप से 10 अक्टूबर तक 841.4 मिमी. बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन उसके मुकाबले 14.4 फीसद कम यानी कुल 720.6 मिमी. पानी ही गिर पाया। यह दीगर बात है, कुछ इलाकों में अप्रत्याशित ढंग से बादलों ने नेमत लुटाई।  

बुंदेलखंड को मिली राहत

पूर्वी उत्तर प्रदेश तो बारिश के मामले में हमेशा ही धनी रहता है, लेकिन इस बार मेघ बुंदेलखंड पर ज्यादा मेहरबान रहे। यहां इस बार कुल 786.5 मिमी यानी सामान्य के मुकाबले 98.4 फीसद बारिश रिकॉर्ड हुई। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संकट बरकरार

बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून सबसे अधिक कमजोर रहा। यहां सामान्य के मुकाबले 33 फीसद बारिश कम हुई। सेंट्रल यूपी में भी बारिश अच्छी नहीं रही। यहां 21 फीसद बारिश कम हुई। 

राजधानी में बीते वर्ष के मुकाबले कम बरसे मेघ

राजधानी में भी इस मानूसन सीजन बारिश कम हुई। बीते वर्ष जहां 983.3 मिमी. बारिश रिकार्ड हुई थी इस बार केवल 850.4 मिमी. हुई जो सामान्य के मुकाबले कम रही। 

प्वाइंटर 

  • 22 जून को प्रदेश में मानसून ने दी थी दस्तक 
  • 111 दिन की यात्रा खत्म करके शुक्रवार को ली विदाई 
  • 841.4 मिमी. बारिश 10 अक्टूबर तक होनी चाहिए थी
  •  720.6 मिमी. पानी ही गिर पूरे चौमासे गिर पाया 

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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