यूपी में लापता जवान को 28 साल बाद मिला इंसाफ, पत्नी ने सेना से कानूनी जंग जीतकर मिटाया पति पर लगा भगोड़ा होने का दाग
28 साल पहले लापता हुए सेना के जवान देवेंद्र प्रसाद आर्या की पत्नी जानकी देवी को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है।

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HighLights
28 साल पहले लापता हुए जवान को भगोड़ा घोषित किया गया।
पत्नी जानकी देवी ने 28 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
अधिकरण ने पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया।
निशांत यादव, लखनऊ। सेना की माउंटेन डिवीजन में विषम प्राकृतिक हालात के बीच तैनात जवान ड्यूटी के दौरान लापता हो गया। सेना कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के बाद लापता जवान को भगोड़ा घोषित कर देती है। पति पर लगे इस दाग को मिटाने के लिए पत्नी रक्षा मंत्रालय से लेकर सिविल कोर्ट तक डटी रही।
करीब 28 साल की लंबी लड़ाई के बाद सशस्त्र बल अधिकरण की लखनऊ पीठ से महिला को न्याय मिला है। पीठ ने रक्षा मंत्रालय को सिपाही को मृत मानते हुए पारिवारिक पेंशन उनकी पत्नी जानकी देवी के पक्ष में जारी करने के आदेश दिए हैं।
उत्तराखंड के बागेश्वर के कसौनी स्थित नाकुरी गांव के रहने वाले सिपाही देवेंद्र प्रसाद आर्या 17 मई 1988 को कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए थे।
सेना की 57 माउंटेन डिवीजन कैंप की यूनिट लाइन से वह 23 जून 1998 को लापता हो गए थे। सिपाही देवेंद्र प्रसाद आर्या का पता लगाने के लिए कर्नल रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में 10 जनवरी 2001 को कोर्ट आफ इंक्वायरी गठित की गई। सेना के अधिकारियों ने सिपाही देवेंद्र प्रसाद आर्या के घर और पुलिस स्टेशन तक जाकर पड़ताल की।
रक्षा मंत्रालय से जारी नहीं हो रही थी पेंशन
आर्मी एक्ट 1950 के तहत लापता सिपाही देवेंद्र प्रसाद आर्या को भगोड़ा घोषित करते हुए सेवा से बर्खास्त करने का आदेश 20 अक्टूबर 2008 को दे दिया गया। सिपाही देवेंद्र प्रसाद आर्या की पत्नी जानकी देवी ने 17 अगस्त 2012 को कुमाऊं रेजिमेंट के अभिलेख ऑफिस को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें अपने पति को लापता मानते हुए मृत घोषित करने की कार्रवाई करने और पारिवारिक पेंशन स्वीकृत करने के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
जानकी देवी ने पति को लापता मानते हुए मृत घोषित करने के लिए सिविल जज, बागेश्वर के समक्ष वाद संख्या 04/2019 दायर किया था, जिसका निर्णय 20 मार्च 2021 के आदेश के तहत उनके पक्ष में हो गया। लंबे पत्राचार के बाद भी रक्षा मंत्रालय भगोड़े सिपाही को मृत मानकर पारिवारिक पेंशन जारी नहीं कर रहा था।
जानकी देवी ने सशस्त्र बल अधिकरण की लखनऊ पीठ में अपील दायर की। अधिकरण के न्यायिक सदस्य अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता और प्रशासनिक सदस्य वाइस एडमिरल अतुल कुमार जैन (अवकाशप्राप्त) ने अपने आदेश में कहा कि याची महिला निरक्षर है और सुदूर एरिया में रहती है। उसके पक्ष में पति को मृत मानने का सिविल कोर्ट का मजबूत आधार है।
ऐसे में रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड ऑफिस की ओर से पर्याप्त सहयोग भी नहीं दिया गया। 2021 के आदेश के तहत मंत्रालय जवान को मृत मानते हुए पत्नी जानकी देवी के पक्ष में सामान्य पारिवारिक पेंशन चार माह के भीतर जारी करे।
