IT Raids पर बसपा विधायक उमाशंकर के पक्ष में उतरे Yogi Adityanath सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
IT Raids in UP: सभी संस्थाओं को पता है कि उमाशंकर सिंह बीते दो वर्ष से अधिक से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे है।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह -- बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर
HighLights
आयकर विभाग के छापे को बताया बेहद पीड़ा देने वाला
कैंसर पीड़ित उमाशंकर को कुछ भी नुकसान होने पर संस्था होगी जिम्मेदार
दिनेश प्रताप सिंह ने आयकर विभाग और नेता पर साधा निशाना
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ और बलिया के आवास व प्रतिष्ठान पर अचानक आयकर विभाग की छापेमारी की निंदा भी होने लगी है। योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रायबरेली से भाजपा के विधायक दिनेश प्रताप सिंह ने आयकर विभाग की इस कार्रवाई को संवेदनहीनता का परिचायक बताया है।
दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि उमाशंकर सिंह विद्यायक रसड़ा जनपद बलिया जिनके घर में मेरी बेटी व्याही है के घर में आज आयकर विभाग की टीमें रेड कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश के राजनेता और आयकर सहित सभी संस्थाओं को पता है कि उमाशंकर सिंह बीते दो वर्ष से अधिक से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे है।
वर्तमान परिस्थितियों में विधायक उमाशंकर सिंह के लिए धनार्जन नहीं सांसे बचाने में ही सारा समय और धन व्यय हो रहा है। उनके सभी व्यवसाय लगभग बंद हो गए है। वह आज अपने आवास में आइसोलेशन में हैं। उत्तर प्रदेश का विधानसभा का सत्र एक विधायक के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन वहां पर भी उमाशंकर सिंह एक घंटे के लिए भी नहीं जा सके।
उन्होंने कहा कि जिसने भी छापा डलवाया, वह संवेदनहीन है। प्रभु बुद्धि दे। मंत्री ने यह भी कहा कि कैंसर से पीड़ित उमाशंकर सिंह को भी आयकर विभाग ने नहीं छोड़ा, जो उनकी स्थिति को देखकर शर्मनाक है। उमाशंकर सिंह दो ऑपरेशन करा चुके हैं और लखनऊ में अपने घर पर आइसोलेशन में रहते हैं। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उमाशंकर मेरे समधी हैं, और उन्हें इलाज के दौरान भी छापे का सामना करना पड़ा। डॉक्टर और नर्सों को उनके घर में आने-जाने से रोका गया, जो निंदनीय है।
स्वतंत्र प्रभार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस समय बसपा विधायक के घर पर नर्स या डॉक्टर को भी जाने की अनुमति नहीं है, यदि उनके जीवन को कोई हानि होती हैं तो ये आयकर विभाग जैसी संवेदनहीन संस्था जिम्मेदार होंगी।
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उनकी इस प्रकार की गंभीर परिस्थितियों में दुर्लभतम अपराधों में भी माननीय कोर्ट दया के आधार पर याचिका स्वीकार कर दोष मुक्त कर देते है।
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किंतु इस कठिन दौर में भी कौन संवेदनहीन राजनेता या संस्था हो सकती हैं, जो ऐसी परिस्थितियों में भी पीड़ा देने की सोच सकता है। प्रभु ऐसे लोगों को और संस्थाओं को सदबुद्धि दे।
