मोनोपॉज से पहले रात में पसीना आना, नींद टूटना या बेचैनी... कहीं दिल के बीमारी का सिग्नल तो नहीं?
Menopause | लोहिया संस्थान के शोधकर्ताओं ने पाया है कि रजोनिवृत्ति से पहले रात में पसीना आना या दिन में बेचैनी दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
रात में पसीना, बेचैनी दिल की गड़बड़ी का संकेत।
कमजोर हार्ट ब्रेक सिस्टम, तेज धड़कन दिल से संबंधित।
नियमित व्यायाम, सही खानपान, वार्षिक ईसीजी जरूरी।
कुमार संजय, लखनऊ। Menopause | 40 से 50 साल की उम्र में रात में अचानक पसीना आना, नींद टूटना या दिन में शरीर में बेचैनी सी लगना सिर्फ गर्मी या थकान नहीं है। यह दिल की गड़बड़ी का प्रमुख संकेत हो सकता है। शोधकर्ताओं ने ऐसी 200 महिलाओं पर अध्ययन किया है। ये सभी प्री-मेनोपाज स्टेज में थीं और इन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं थी।
सभी का पांच मिनट ईसीजी कर दिल की धड़कन की लय और उसके उतार-चढ़ाव की जांच की गई। स्टडी में सामने आया कि जिन महिलाओं को रात में पसीना आता था, उनके दिल का ब्रेक सिस्टम कमजोर था।
जिन्हें दिन में अचानक गर्मी लगने (हाट फ्लैश) की शिकायत थी, उनका दिल हर समय तेज रफ्तार मोड पर था। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों लक्षण का सीधा संबंध दिल के नर्वस सिस्टम से है। यह शोध लोहिया संस्थान के डाक्टरों ने किया है, जिसे जर्नल आफ मिडलाइफ हेल्थ ने स्वीकार किया है।
दिल की धड़कन के बीच जो गैप होता है, उसे एचआरवी कहते हैं। हार्ट अटैक से कई साल पहले ही यह गैप घटना शुरू हो जाता है। सामान्य तौर पर दिल का ब्रेक 300 से 1000 के बीच होना चाहिए, इससे नीचे होने पर थकान, तेज धड़कन और बीपी की समस्या बढ़ती है।
एलएफ/एचएफ का स्तर 2.5 से ऊपर जाना खतरे की घंटी है, इससे लंबे समय में हार्ट अटैक का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे में इन लक्षणों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। 45 साल के बाद वर्ष में एक बार ईसीजी जरूर कराएं।
ये है बचाव के तरीके
प्रतिदिन 15 मिनट अनुलोम-विलोम और भ्रामरी करें। भोजन में नमक की मात्रा प्रतिदिन पांच ग्राम से अधिक न हो। दूध, दही, रागी, सोया और कैल्शियम वाली वस्तुएं हर दिन लें। रोजाना 40-45 मिनट तेज गति से पैदल चलना जरूरी है।
इन्होंने किया शोध
इस अध्ययन में लोहिया संस्थान के बायोकेमिस्ट्री से डॉ. मनीष राज कुलश्रेष्ठ, एमएस एवं कम्युनिटी मेडिसिन से डॉ. अरविंद कुमार सिंह, फिजियोलाजी विभाग से डॉ. विभा गंगवार, डॉ. मनीष वर्मा, डॉ. सुनीता तिवारी और गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीतू सिंह शामिल रहे।
पांच साल पहले आ रहा मेनोपाज
पोषण की कमी से अब मेनोपाज पांच साल पहले आ रहा है। इसकी औसत उम्र 51 साल है, जबकि भारत में यह घटकर 46.2 साल रह गई है। एसजीपीजीआइ की प्रो. इंदु लता ने बताया कि 57% महिलाओं में खून और आयरन-कैल्शियम-विटामिन डी की कमी से ओवरीज जल्दी थक रही हैं, जिससे मेनोपाज का समय भी घट रहा है।
