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लखनऊ [अजय श्रीवास्तव]। लखनऊ में चुनाव हो और सुषमा स्वराज का ओजस्वी भाषण न हो,  ऐसा संभव नहीं था। वर्ष 2012 में चौक के संतोषी माता मंदिर के पास आयोजित विधानसभा की चुनावी सभा में सुषमा के संबोधन ने चुनावी हवा को बदल दिया था। विपक्षी दलों के काले चिट्ठे खोलकर रख दिए थे। उन लोगों पर भी हमला बोला था, जो देश में रहकर नफरत की आग उगलते हैं। अपने तीन मिनट के भाषण में एक बार भी ब्रेक नहीं लिया था। 

उनकी भाषण देने की कला और अपने संबोधन से हर किसी के करीब पहुंचने वाली सुषमा स्वराज का लखनऊ से खासा नाता रहा था। आलमबाग, मवैया, निशातगंज, गणेशगंज, लालकुआं, अमीनाबाद अलीगंज सेक्टर क्यू में तो उनकी सभाएं होती ही थीं। लगातार कुछ घंटे के अंतराल में भाषण देने के बाद ही उनके चेहरे पर थकान के भाव नहीं दिखते थे और चेहरे पर पहले जैसी ही मुस्कराहट बनी रहती थी।  

मातृत्व व स्नेह का भाव था 

उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा कहते हैं कि युवा मोर्चा के समय से सुषमा स्वराज से बातचीत की थी। वह महिलाओं और युवाओं को बढ़ाने के पक्षधर में रहती थीं। लखनऊ के चुनाव में उनकी सभा की बहुत डिमांड रहती थी। उनमें मातृत्व व स्नेह का भाव था और वह सभी कार्यकर्ताओं को सामान भाव देती थीं। उनके निधन से देश को बड़ी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है। 

अलीगंज में भी करती थीं सभाएं

चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन गोपाल कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी की चुनावी सभा में सुषमा स्वराज आती थीं और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में बाबूजी (लालजी टंडन) का चुनाव प्रचार करने अलीगंज के सेक्टर क्यू में भी सभा करती थीं। बाबूजी से मिलने भी वह चौक वाले घर आ चुकी थीं। सुषमा स्वराज का लखनऊ से भी नाता रहा है। वह पार्टी के प्रमुख कार्यक्रमों में नजर आती थीं। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव तक में स्टार प्रचारकों के रूप में उनकी मांग होती थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चुनावी सभाओं में वह कई बार लखनऊ आईं थीं। लखनऊ में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी वह वर्ष 2006 और 2011 में आईं थी। 

महिलाओं का करती थीं सम्मान

लखनऊ के कई कार्यक्रमों में सुषमा स्वराज के साथ रहीं वर्तमान महापौर संयुक्ता भाटिया भी उनके निधन से दुखी हैं। वह कहती हैं कि सुषमा स्वराज की अभी देश को जरूरत थी। महापौर कहतीं कि महिला मोर्चा के कई कार्यक्रमों में वह लखनऊ आईं थीं। वह सर्वसुलभ नेता थीं और पार्टी में महिलाओं की आवाज को उठाई थीं। चुनाव में महिला आरक्षण में  सुषमा स्वराज की खास भूमिका रहती थी। लखनऊ में चुनाव के दौरान हर किसी को सुषमा स्वराज के कार्यक्रम की चिंता रहती थी। उनकी सभा में भारी भीड़ जुटती थी और ओजस्वी भाषण से भाजपा के पक्ष में माहौल बना देती थीं।

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Posted By: Anurag Gupta

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