जागरण संवाददाता, लखनऊ : शहर तभी स्वच्छ व सुविधाओं से संपन्न होगा जब सभी जागरूक होंगे और अपना योगदान देंगे। शहर के विकास के विभिन्न मानकों को पूरा करने में जन सहयोग की भी जरूरत है। व्यवस्था में खामियां हैं पर, इसकी जिम्मेदार सरकार ही नहीं, आमजन भी हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा व आर्थिक व्यवस्थ मजबूत करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने में सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

ये सुझाव शनिवार को माय सिटी माय प्राइड अभियान के तहत आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने दिए। दैनिक जागरण के मीराबाई मार्ग स्थित कार्यालय में आयोजित कांफ्रेंस के दौरान राजधानी में स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, इकोनॉमी व सुरक्षा की स्थिति व इसमें सुधार की संभावनाओं पर मंथन किया गया। इन पांचों विषयों पर पूर्व में अलग-अलग आयोजित हो चुकी कांफ्रेंस में पारित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने अधिकांश प्रस्तावों पर सहमति जताई। साथ ही कुछ में संशोधन के लिए सुझाव भी दिए। कांफ्रेंस में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के अलावा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नीरज बोरा भी मौजूद रहे। अतिथियों ने माय सिटी माय प्राइड कैंपेन की सिटी लिवेबिलिटी सर्वे रिपोर्ट 2018 के अनुसार हिंदी भाषी राज्यों के दस शहरों में रहने के लिए इंदौर के बाद लखनऊ को सबसे बेहतर शहर माने जाने पर खुशी जतायी। साथ ही नंबर वन शहर बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए।

शहर को संवारने के लिए हो जन आंदोलन
उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नीरज बोरा ने कहा कि इंदौर यूं ही स्वच्छता नंबर वन नहीं है, वहां इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया गया है। ऐसा लखनऊ में भी होना चाहिए। लोग खुद अपने शहर को साफ रखने, गंदा करने वालों व ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वालों को टोकने के लिए आगे आएं। स्मार्ट सिटी की निगरानी के लिए हर क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने चाहिए।

 

अगर मुहल्ला समितियां सक्रिय हो जाएं तो कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता पर बेहतर काम किया जा सकता है। शिक्षा व्यवस्था सुधार के लिए सरकार शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। पुलिस बल बढ़ाने के साथ ही ट्रैफिक सिस्टम सुधारने पर भी जोर देना होगा। यदि व्यापारी सहयोग करें तो सड़कों से अतिक्रमण कम होगा और यातायात बेहतर करने में भी आसानी होगी। शहर में भूगर्भ जल का संकट बढ़ता जा रहा है। आज कई क्षेत्रों में 350 फीट के नीचे पानी मिल रहा है। ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था हर घर में की जानी चाहिए।

नियम बनाएं और पालन भी कराएं
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज के वैज्ञानिक डॉ. चंद्र मोहन नौटियाल ने कहा कि नियम बनाना तो आसान है, लेकिन पालन कराना कठिन। कई बार कानून बना दिए जाते हैं, पर जिम्मेदार उसे भूल जाते हैं। प्लास्टिक पर प्रतिबंध का फैसला सही है। इसे पूरी तरह से लागू भी किया जाना चाहिए। शहर में यातायात नियमों का पालन नहीं होता। नागरिक खुद के दायित्वों के प्रति सचेत नही हैं। पुलिस भी कर्तव्यों के प्रति कहीं न कहीं उदासीन दिखती है। ऐसे में स्कूलों में विद्यार्थियों को संस्कारों का पाठ पढ़ाया जाए। यातायात नियमों की जानकारी कोर्स में शामिल हो। बच्चों को सही एजुकेशन देकर हम शहर के विकास में उनकी भी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

हमें गर्व होता है कि लखनऊ पार्कों का शहर है, लेकिन यहां के पार्कों की दशा पर तरस आता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि पार्क गोद लें और उसे संवारने में योगदान दें। प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन बेल्ट बढ़ाने के
साथ ही एक मकान, एक वाहन के नियम को भी लागू किया जा सकता है।
- बनवारी लाल कंछल, पूर्व सांसद

देश-प्रदेश में स्वच्छता अभियान चल रहा है, पर प्रदूषण कम नहीं हो रहा। नदियों की हालत दयनीय है। यदि लोग पॉलीथिन का प्रयोग बंद कर दें तो 50 फीसदी स्वच्छता अपने आप ही बढ़ जाएगी।
-कृष्णानंद राय, कवि

शहर के विकास में रेलवे का अहम योगदान है। गोमतीनगर स्टेशन के लिए 1900 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसके इतर रेल लाइनों का विस्तार किया जा रहा है। रेलवे स्टेशनों में स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन आमजन के
सहयोग के बिना स्वच्छता का अभियान पूरा नहीं हो सकता। रेलवे लाइन के किनारे अतिक्रमण रोकने व सफाई के लिए कार्पोरेट सेक्टर की मदद लेने के संबंध में प्रस्ताव बनाएंगे।
-आलोक श्रीवास्तव, जन संपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे

चिकित्सा सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए सभी विधाओं को प्रमोट करना होगा। आम धारणा है कि होम्योपैथिक दवाएं धीरे-धीरे काम करती हैं, लेकिन यदि समय से ये दवाएं रोगी को मिलें तो एलोपैथी की तरह काम करेंगी। हालांकि अभी होम्योपैथी संस्थान और उसकी सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है।
-डॉ. शैलेंद्र सिंह, प्रोफेसर होम्योपैथ

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले शिक्षण संस्थाओं में शिक्षकों के खाली पदों को भरना होगा। इसके अलावा शहर में जनसंख्या बढ़ती जा रही है। यदि गांवों में ही कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए और विकास हो तो ग्रामीणों का पलायन रुक जाएगा। उन्हें गांव में ही रोजगार मिलने से बेरोजगारी भी दूर हो जाएगी।
- डॉ. ऋषि कुमार मिश्र, एसोसिएट प्रोफेसर।

विकास में सभी की भूमिका होनी चाहिए। छोटे-छोटे कार्यों के लिए प्रशासन पर आश्रित रहने की बजाए खुद करने का प्रयास करना चाहिए। मेट्रो लाइन के किनारे अतिक्रमण बढ़ रहा है, शहर के विकास के लिए इस पर रोकथाम आवश्यक है। इसके साथ ही अनियोजित कॉलोनियों में सरकार जल्द विकास कराए।
- सुशील कुमार, महासचिव, इंदिरानगर आवासीय समिति।

लखनऊ के अनियोजित विकास के लिए एलडीए व आवास विकास जिम्मेदार हैं। लगातार ऐसी बिल्डिंग बन रही हैं, जिनमें पार्किंग की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में वाहन सड़कों पर खड़े किए जाते हैं, जो जाम का कारण बनते हैं। नयी बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग बनाने पर सख्ती न की गई तो आने वाले 100-150 वर्ष तक सड़क पर पार्किंग व जाम की समस्या से निजात नहीं मिलेगी।
- संजय गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष आदर्श व्यापार मंडल।

शहर के शिक्षण संस्थानों पर मेधावी छात्रों का भरोसा नहीं है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठता है। इसके लिए शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त किया जाना चाहिए। सड़कों को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। एक बार हटाया गया अवैध कब्जा या अतिक्रमण दोबारा होने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
-देवी शरण त्रिपाठी, अध्यक्ष इंदिरानगर आवासीय समिति

लखनऊ को सुंदर बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण करना होगा। साथ ही प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए ग्रीन बेल्ट को बढ़ाना होगा। इसमें सरकार के साथ ही जनता को सहयोग करना चाहिए। जब सभी चेतेंगे तभी तस्वीर संवरेगी। -उषा बाजपेयी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर लखनऊ विश्वविद्यालय।

 

By Gaurav Tiwari