विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अपना ही 'उसूल' भूलीं मायावती, BSP में बढ़ी बहनजी की वंशबेल; अब छोटे भतीजे को भी कराई एंट्री

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:55 PM (IST)Updated: Thu, 10 Sep 2026 09:08 PM (IST)

बसपा प्रमुख मायावती ने अपने ही परिवारवाद विरोधी उसूलों को दरकिनार करते हुए छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिया है।

अब छोटे भतीजे को भी पार्टी में किया लांच।

अब छोटे भतीजे को भी पार्टी में किया लांच।

HighLights

  1. मायावती ने छोटे भतीजे ईशान आनंद को बसपा में महत्वपूर्ण पद दिया।

  2. बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया।

  3. मायावती के परिवारवाद विरोधी पुराने बयानों पर अब सवाल उठते हैं।

अजय जायसवाल, लखनऊ। ‘मेरा उसूलहै कि मैं परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से साल में केवल एक ही बार अपने जन्मदिन के मौके पर मिलती हूं, लेकिन अपने परिवार के सभी सदस्यों को मैं राजनीति से बहुत दूर रखती हूं, ताकि मेरे ऊपर कोई परिवारवाद का आरोप न लगा सके। मैंने बहुजन समाज की खुशहाली के लिए अपना समस्त जीवन बहुजन समाज को समर्पित कर दिया है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैंने जीवनपर्यन्त अविवाहित रहने का दृढ़ संकल्प भी लिया है।‘

वर्ष 2006 में अपने 50वें जन्मदिन के मौके पर 15 जनवरी को बसपा प्रमुख मायावती ने खुद के हाथों विमोचित पुस्तक ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेन्ट का सफरनामा’ के पहले भाग में यह लिखा जरूर, लेकिन वह अपना ही उसूल भूलती गईं।

पंजाब के दलित समाज से आने वाले कांशीराम से बसपा की कमान संभालने वाली मायावती राजनीति में वंशवाद की सदैव मुखालफत करती रही हैं, लेकिन उनके सगे भाई आनंद कुमार पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। फिर मायावती ने भाई के बड़े बेटे (बड़े भतीजे) आकाश आनंद को राजनीति का ककहरा सिखाया और पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्ट्रीय समन्वयक) जैसा अहम पद सौंपा।

ईशान आनंद की पार्टी में एंट्री

भतीजे के ससुर पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ की पार्टी विरोधी गतिविधियों से परिवारिक कलह बढ़ी तो तीसरी बार आकाश से पद छीना और फिर गुरुवार को उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया, लेकिन इस बीच मायावती ने छोटे भतीजे (आकाश के छोटे भाई) ईशान आनंद की भी पार्टी में इंट्री करा दी। लगभग 27 वर्षीय ईशान अपने पिता आनंद के कारोबार को संभालते रहे हैं, अब वह बसपा के चीफ सेक्टर कोआर्डिनेटर भी है।

तीन सितंबर को राष्ट्रीय स्तर की बैठक में ईशान के साथ पहुंची मायावती ने सभी पदाधिकारियों से उसका परिचय कराया था। गुरुवार को ईशान के इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एकांउट को सार्वजनिक किया।

ईशान को उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड राज्य को छोड़ शेष में संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। ईशान को अपने कार्यों की रिपोर्ट सीधे बुआ मायावती और पिता आनंद को देनी हैं।

कांशीराम ने मायावती को घोषित किया था राजनीतिक उत्तराधिकारी

शोषित-पीड़ित बहुजन समाज के उत्थान के लिए 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करने वाले कांशीराम ने 15 दिसंबर 2001 को मायावती को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। मायावती ने 18 सितंबर 2003 को बसपा की पूरी तरह से कमान संभाली।

कांशीराम के जीवित रहते बसपा कभी बहुमत की सरकार तो नहीं बना सकी, लेकिन मायावती दूसरे दलों के सहयोग से तीन बार मुख्यमंत्री जरूर बनीं। मायावती ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग के नए फार्मूले के तहत पार्टी के दरवाजे सर्वजन समाज के लिए खोल दिए।

खासतौर से अपर कास्ट के ब्राह्मण और मुस्लिम समाज को अपने से जोड़ने के दांव से चुनाव में 206 सीटें हासिल कर बसपा पहली बार बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं।

हालांकि, मायावती के बदले रुख से पार्टी और सरकार में अपर कास्ट के बढ़ते दबदबे से बहुजन समाज का एक वर्ग बसपा से छिटकने लगा। कांशीराम के साथ वाले कई नेता या तो बसपा से बाहर हो गए या फिर खुद ही किनारे हो लिए। ऐसे में पिछले डेढ़ दशक के चुनावों में पार्टी के साथ उसका आधार वोट बैंक दलित भी पहले की तरह नहीं रहा।

खिसकते जनाधार से पार्टी की दुर्दशा को देखते हुए पिछले लोकसभा चुनाव से पहले मायावती ने अपने युवा बड़े भतीजे आकाश को उत्तराधिकारी घोषित कर दलित युवाओं में नए सिरे से पार्टी की पैठ बनाने का नया राजनीतिक दांव चला था, लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उत्तराधिकारी तो दूर अब उसे पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

हालांकि, माना यही जा रहा है कि ‘सयानापन’ दिखाने वाले समधी अशोक के संन्यास लेने की घोषणा से अंततः मायावती की आकाश के प्रति नाराजगी दूर होगी और आकाश आनंद एक बार फिर पार्टी में अहम भूमिका निभाएंगे।

मायावती की तीसरी पीढ़ी तक से बहुजन राजनीति की उम्मीद

अपने जिस बड़े भतीजे आकाश आनंद को मायावती ने गुरुवार को पार्टी से फ्री करने की घोषणा की है उसकी बेटी तक को भविष्य में बहुजन समाज की राजनीति में लाए जाने की जमीन तैयार हो रही थी। लगभग पौने दो वर्ष पहले बेटी के जन्म पर आकाश ने उसे पार्टी के मिशन के लिए तैयार करने की इच्छा जताई तो बसपा सुप्रीमो ने उसका स्वागत किया था।

बेटी के जन्म पर मायावती ने एक्स पर खुशी जताते हुए लिखा था कि ‘बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को पुत्री के रूप में परिवार में नई सदस्य की प्राप्ति पर सभी लोगों में खुशी की लहर है।

वहीं, उनके लिये इससे भी ज्यादा हर्ष व गौरव की बात यह है कि आकाश ने अपनी बेटी को बहनजी की तरह ही बहुजन समाज के मिशन के प्रति समर्पित करने के लिये तैयार करने की इच्छा व्यक्त की है। इसका भरपूर स्वागत।’ उनकी इस पोस्ट के बाद पार्टी के अंदर से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में परिवारवाद को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थी।

बसपा में हलचल से सजग विरोधी

प्रदेश की राजनीति में हाथी (बसपा) की चाल का अपना असर है। पिछले कुछ वर्षों से उसकी ताकत जरूर कम हुई है, लेकिन राजनीतिक प्रभाव बरकरार दिखा। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनावों में पार्टी भले ही कोई कमाल नहीं कर सकी लेकिन दूसरों का खेल बिगाड़ते जरूर दिखी।

बीते कुछ चुनावों में भाजपा की बड़ी विजय के पीछे विरोधी, बसपा की दूसरों को हरवाने की इसी खासियत को बड़ी वजह मानते हैं। परिवारिक मनमुटाव व पार्टी की गुटबाजी से मची हलचल के बीच मायावती अपनी ताकत बरकरार होने के संकेत जरूर दे रही हैं लेकिन बसपा की ‘थकान’ विरोधियों को दिख रही है।

युवा आकाश आनंद के आक्रामक अंदाज से पार्टी नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन सुधरने की उम्मीद दिखने लगी थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद उनमें भी मायूसी है।

यह भी पढ़ें- योगी सरकार का फोकस: स्कूल ड्रेस और किताबों के पैसे कहीं और न हों खर्च, विद्यालय स्तर पर होगा सत्यापन

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।