लखनऊ, जागरण संवाददाता। आदर्श कारागार की पाकशाला (भोजनालय) में सोमवार दोपहर माहौल ही कुछ अलग था। जब मास्टर सेफ रणवीर बरार की टिप्स पर कैदियों ने देशी घी में जीरा और खड़ी मिर्च का तड़का दाल में लगाया तो सोंधी खुशबू से ही अधिकारियों और कर्मचारियों के मुंह में पानी आ गया। वहीं, हरी मिर्च, सुगंधित और पौष्टिक मसालों के मिश्रण से लोहे की कढ़ाही में बनी लौकी की सब्जी रंग ही अपना टेस्ट बता रही थी।

भोजन बनते ही शेफ रणवीर बरार अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक साथ खाया। राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान और कारागार विभाग के बीच हुए मसौदे के क्रम में मास्टर शेफ ने पहुंचकर कैदियों को व्यंजन और खाद्य पदार्थों को बनाने की प्रशिक्षण की शुरूआत की। डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

इस दौरान बरार ने कहा कि भोजन करके पेट तो सभी भर लेते हैं किंतु खाद्य पदार्थ पकाने की विधि पर निर्भर करता है कि वह कितना पौष्टिक, स्वादिष्ट है। उन्होंने कैदियों को बताया कि दाल बनाने से पहले उसे भिगो दें। इससे पकाने में ईंधन भी कम लगेगा। अच्छी सब्जी बनाने के लिए जब वह पानी छोड़ दे तो धीमी आंच में पकाएं। खाने में लाल मिर्च के स्थान पर हरी मिर्च, अदरक और हींग का प्रयोग करें। बेकरी की अपेक्षा इलेक्ट्रिक ओवन में बने बेकरी प्रोडक्ट मार्केट में आसानी से अपनी जगह बना सकते हैं। .

इस दौरान राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निसबड) की डायरेक्टर डाक्टर पूनम सिन्हा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की डीजी अनुराधा वेमुरी, आदर्श कारागार के अधीक्षक सीपी त्रिपाठी व अन्य लोग भी मौजूद रहीं। इस दौरान मास्टर शेफ ने अपने जीवन के संघर्षों के बारे में भी बताया। मास्टर शेफ ने बताया कि अब तक वह 37 देशों के होटलों और अनेक टीवी शो से जुड़े हुए हैं और खाद्य पदार्थ बनाने, वैल्यू एडीशन की टिप्स देते हैं।

Edited By: Anurag Gupta