लखनऊ [राफिया नाज़]। ब्रेस्ट कैंसर ईस्ट्रोजन हार्मोन्स पर निर्भर करता है। इस हार्मोन के बढ़ने से स्‍तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अधिकतर लोग स्‍तन कैंसर को महिलाओं की बीमारी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। स्‍तन कैंसर पुरुषों में भी होता है, हालांकि महिलाओं के मुकाबले इसका आंकड़ा बेहद कम है। पूरे विश्‍व में एक प्रतिशत से भी कम ब्रेस्‍ट कैंसर पुरुषों में पाया जाता है। पुरुषों में ये बीमारी ज्‍यादा उम्र में होती है, इसलिए सीने के आसपास होने वाली दर्द रहित गांठ के प्रति सजग रहने की जरूरत है। पुरुषों में होने वाले कैंसर को लेकर केजीएमयू की जनरल सर्जरी विभाग की असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ गीतिका नंदा सिंह से खास बातचीत। 

ब्रेस्‍ट कैंसर का कोई भी एक ठोस कारण ज्ञात नहीं है। फिर भी ये कैंसर ईस्ट्रोजन हार्मोन के बढ़ने पर निर्भर करता है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन होते हैं, किन्‍हीं कारणों से इन हार्मोन की कमी होने लगती है। जिसकी वजह से शरीर में ईस्ट्रोजन हार्मोन ज्यादा बनने लगते हैं। पुरुषों में ये कैंसर 40 वर्ष की आयु के बाद होता है। सीने के आसपास किसी भी तरह की पेनलेस गांठ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। ग्‍लोबल डेटा 2018 के अनुसार महिलाओं में ब्रेस्‍ट कैंसर 24 प्रतिशत होता है जबकि पुरुषों में ये कैंसर एक प्रतिशत से कम होता है।

ज्यादा ईस्ट्रोजन हार्मोन बनने का कारण

पुरुषों में स्‍तन कैंसर के बड़े कारणों में एक है फैमिली हिस्‍ट्री। अगर किसी की फैमिली हिस्‍ट्री में जेनेटिक सिंड्रोम है जिसकी वजह से टेस्‍टीस (वृषण) ठीक तरह से काम नहीं करती है और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में कमी आने लगती है। इससे ईस्ट्रोजन हार्मोन ज्यादा बनने लगते हैं। वृषण कैंसर में अगर पुरुष की एक या दोनों टेस्‍टीस निकाल दी गईं हैं तो टेस्‍टोस्‍टेरोन हार्मोन की कमी होने लगती है। वहीं अगर लिवर और किडनी में दिक्‍कत है तो भी शरीर में ईस्ट्रोजन हार्मोन बनने लगते हैं, क्‍योंकि लिवर और किडनी में टेस्‍टोस्‍टेरोन मेटाबोलिज्‍म होने लगता है। जिससे टेस्‍टोस्‍टेरोन, ईस्ट्रोजन हार्मोन में बदलने लगता है। इसके अलावा पुरुषों में अत्‍याधिक मोटापा भी स्‍तन कैंसर का एक कारण हो सकता है।

ये हैं लक्षण

महिलाओं की तरह पुरुषों में भी स्‍तन कैंसर में एक पेनलेस गांठ होती है। पुरुषों में ये अधिकतर निपिल के नीचे की ओर होती है। पुरुषों में निपिल में डिस्‍चार्ज की समस्‍या नहीं होती है। इसके अलावा बगल में होने वाली गांठ, ब्रेस्‍ट की त्‍वचा में किसी तरह का गड्ढा होना, ब्रेस्‍ट में सूजन होना, त्‍वचा का संतरे के छिलके की तरह हो जाना आदि लक्षण होते हैं।

ऐसे होती हैं जांच

महिलाओं की तरह पुरुषों में भी ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच के लिए अल्‍ट्रासाउंड, मेमोग्राफी और एफएनएसी होती है। वहीं कैंसर की स्‍टेज के अनुसार इलाज किया जाता है। जिसमें सर्जरी या कीमोथेरेपी की जाती है।

पुरुषों में होता है ज्‍यादा रिस्‍क

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ब्रेस्‍ट कैंसर ज्‍यादा जानलेवा होता है। पुरुषों में ब्रेस्‍ट टीश्‍यू कम होते हैं जिसकी वजह से ये कैंसर तेजी से फैलता है और सीने के ज्‍यादा पास होता है।

ओपीडी में आए तीन केस

डॉ गीतिका ने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक केजीएमयू की सर्जरी ओपीडी में वो तीन पुरुष ब्रेस्‍ट कैंसर के मरीज देख चुकी हैं। जागरुकता की कमी की वजह से से पुरुषों में ब्रेस्‍ट कैंसर का पता देर से चलता है।

ये हैं फेक्‍ट

  • पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले ज्‍यादा तेज़ी से फैलता है ब्रेस्‍ट कैंसर
  • पुरुषों में ब्रेस्‍ट कैंसर की गांठ अधिकतर निपिल के नीचे की ओर होती है।
  • टेस्‍टोस्‍टेरोन की कमी होने से रहता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

इन्‍हें है खतरा

  • 40 वर्ष से अधिक के पुरुषों में
  • जिनका टेस्‍टीस का ऑपरेशन हो चुका है
  • जिन्‍हें लिवर या किडनी में दिक्‍कत है
  • अधिक मोटे पुरुषों में

Posted By: Anurag Gupta

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