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लखनऊ के अमान्य मदरसों के विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट, नहीं बनी फंड ऑडिट नीति

Published: Fri, 11 Sep 2026 09:43 PM (IST)

लखनऊ में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के हजारों छात्रों को परिषदीय विद्यालयों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रुक गई है।

मान्य मदरसों के विद्यार्थियों का अटका भविष्य।

मान्य मदरसों के विद्यार्थियों का अटका भविष्य।

HighLights

  1. लखनऊ में 111 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों का दाखिला रुका।

  2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दाखिला प्रक्रिया पर लगी रोक।

  3. अमान्य मदरसों को मिलने वाले चंदे के ऑडिट की नीति नहीं।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों को परिषदीय विद्यालयों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया फिलहाल अधर में है। राजधानी में कराए गए सर्वे में 111 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित मिले थे, जिनमें करीब 13,897 छात्र-छात्राएं पंजीकृत पाए गए।

इन विद्यार्थियों को बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के निर्देश शासन की ओर से जारी हुए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने और शासन के आदेश पर रोक लगने के बाद दाखिले की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

बेहद गंभीर बात है कि अमान्य मदरसों को मिलने वाले चंदे या फंडिग के ऑडिट की भी जिम्मेदारी किसी को तय नहीं की गई। ऐसे में स्थिति जस की तस ही है। चंदे व अन्य आर्थिक मदद का ऑडिट भी अंधेरे में है।

शासन के निर्देश पर पूर्व में प्रदेशभर में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराया गया था। इसी क्रम में लखनऊ में 111 मदरसे चिह्नित किए गए थे। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के निर्देश के क्रम में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन ने 26 जून 2024 को गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए थे।

इसके पीछे विद्यार्थियों को औपचारिक एवं मान्यता प्राप्त स्कूली शिक्षा से जोड़ने की व्यवस्था थी। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी पवन सिंह बताते हैं कि मदरसा संचालकों ने मुख्य सचिव के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका को लेकर 21 अक्टूबर 2024 को पारित आदेश के बाद शासन ने 20 दिसंबर 2024 को पत्र जारी कर 26 जून 2024 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

इसके बाद गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को परिषदीय विद्यालयों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया फिलहाल थम गई। राजधानी में 18 राज्य अनुदानित मदरसे भी संचालित हैं, जिनमें करीब 4076 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।

पवन सिंह का कहना है कि राज्य अनुदानित मदरसों को सरकारी सहायता के अतिरिक्त मिलने वाले चंदे और अन्य आर्थिक मदद का ऑडिट संबंधित मदरसों की ओर से स्वयं कराया जाता है। इसके लिए अलग से कोई ऐसी व्यवस्था नहीं।

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