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लखनऊ के SGPGI में स्वाइन फ्लू के आठ, बलरामपुर अस्पताल में दो और RML में मिला एक स्वाइन फ्लू संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

Published: Sun, 30 Aug 2026 07:34 AM (IST)

लखनऊ में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है, जिसमें एसजीपीजीआई, बलरामपुर और आरएमएल अस्पतालों में नए ...और पढ़ें

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी। सांकेतिक तस्वीर

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी। सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. एसजीपीजीआई, बलरामपुर, आरएमएल में स्वाइन फ्लू के नए मरीज।

  2. स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर अस्पतालों में बेड आरक्षित किए।

  3. सीएमओ ने सावधानी बरतने, घबराने की नहीं सलाह दी।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में स्वाइन फ्लू ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) में बीते कुछ दिन के भीतर जांच में स्वाइन फ्लू और कोरोना के 16 रोगी मिले हैं। संस्थान ने इन रोगियों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को भेजी है। इनमें अधिकांश मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं।

वहीं बलरामपुर अस्पताल में स्वाइन फ्लू संक्रमित महिला की मौत के बाद दो अन्य संक्रमित मरीज भर्ती किया गया है। जबकि डा राम मनोहर लोहिया अस्पताल में एक संक्रमित मिलने पर उसे भर्ती किया गया है। संक्रमण को देखते हुए बलरामपुर अस्पताल ने चेस्ट वार्ड को स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया है।

सीएमओ का कहना है कि यह मौसम इंफ्लुएंजा का चल रहा है। ऐसे में जांच में मरीजों में एच1ए1 स्वाइन फ्लू और कोरोना संक्रमण मिल रहा है। सभी रोगियों में हल्के लक्षण हैं। लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

एच1एन1 को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में बेड आरक्षित
राजधानी में एच1एन1 इंफ्लूएंजा संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मरीजों की जांच और इलाज के लिए अस्पतालों को तैयार रखा गया है। वर्तमान में एक मरीज राम मनोहर लोहिया अस्पताल और दो मरीज बलरामपुर अस्पताल में भर्ती हैं। सभी जिला अस्पतालों में एच1एन1 मरीजों के उपचार के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। निजी अस्पतालों और पैथोलाजी सेंटरों को भी केंद्र सरकार की ओर से जारी जांच और उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनबी सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। शनिवार को हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में भी एच1एन1 संक्रमण की स्थिति और इससे बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों और पैथोलाजी सेंटरों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी देकर जरूरी निर्देश दिए गए हैं।

सीएमओ ने बताया कि सभी जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में एच1एन1 की जांच और उपचार की सुविधा निश्शुल्क उपलब्ध है। किसी भी आपात स्थिति में लोग मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर 0522-2622080 पर संपर्क कर सकते हैं।

लक्षण दिखें तो चिकित्सक से लें सलाह
डा. एनबी सिंह ने लोगों से अपील की कि बुखार, जुकाम, खांसी या इससे जुड़े अन्य लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सक से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर जांच और उपचार कराएं। उन्होंने खुद से दवा लेने और अप्रशिक्षित व्यक्ति से इलाज कराने से बचने की सलाह दी। सीएमओ ने कहा कि एच1एन1 को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। अनावश्यक पैनिक से बचें और बीमारी से संबंधित जानकारी के लिए केवल आधिकारिक व भरोसेमंद स्रोतों पर विश्वास करें।

क्या है एच1एन1
एच1एन1 इंफ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से सांस से जुड़ी बीमारी पैदा करता है। संक्रमण के बाद आमतौर पर दो से तीन दिन में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड सामान्यतः एक से चार दिन का होता है, हालांकि कुछ मामलों में यह सात दिन तक हो सकता है।

ये हैं प्रमुख लक्षण
बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द, बदन में दर्द, ठंड लगना और आंखों में लालिमा इसके प्रमुख लक्षण हैं।

खांसने-छींकने से फैलता है संक्रमण
एच1एन1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। संक्रमित वस्तुओं या सतहों को छूने के बाद हाथ साफ न करने और हाथ मिलाने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।

इन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत

  • 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग।
  • गर्भवती महिलाएं।
  • रक्त संबंधी बीमारी, डायबिटीज, तंत्रिका तंत्र की बीमारी, कैंसर या एचआइवी/एड्स से पीड़ित लोग।
  • फेफड़े, हृदय, किडनी या लीवर की बीमारी से पीड़ित मरीज।
  • लंबे समय से कार्टिसोन जैसी दवाएं लेने वाले मरीज।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
खांसते या छींकते समय नाक-मुंह को रुमाल या कपड़े से ढकें। बातचीत के दौरान करीब एक से डेढ़ मीटर की दूरी बनाए रखें और हाथ मिलाने से बचें। संक्रमित वस्तु या व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। बुखार, खांसी या जुकाम जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह लें।