दादी को लगी चोट तो पोते ने बना दिया बिना झटकों वाला 'नॉन न्यूटोनियन' स्पीड ब्रेकर, मिला इंस्पायर अवॉर्ड
लखनऊ के अभिनंजय पांडेय ने दादी की चोट से प्रेरित होकर एक अनोखा नॉन-न्यूटोनियन स्पीड ब्रेकर मॉडल बनाया है, जो ...और पढ़ें

मॉडल के साथ छात्र अभिनंजय पांडेय, साथ में शिक्षक उत्कर्ष सिंह
HighLights
अभिनंजय ने दादी की चोट से प्रेरित होकर स्पीड ब्रेकर बनाया।
नॉन-न्यूटोनियन ब्रेकर धीमी गति पर झटका नहीं देता, तेज पर देता है।
राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जापान जाने और पेटेंट की संभावना।
आनंद त्रिपाठी, लखनऊ। एक नवाचार कई लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिसे मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज महानगर के छात्र अभिनंजय पांडेय ने सिद्ध कर दिखाया है। वर्ष 2022 में ऑटो से जा रही दादी को ब्रेकर पार करते समय स्पाइनल कार्ड में गंभीर चोट आई, जिसकी सर्जरी भी करानी पड़ी।
इस घटना से द्रवित पोते ने स्पीड ब्रेकर का एक ऐसा मॉडल बना दिया, जिससे धीमी गति से वाहन के गुजरने पर झटका नहीं लगता। उसी के उलट तेज रफ्तार वाहनों को स्पीड ब्रेकर झटका देता है। इस मॉडल के लिए उन्हें 14 अक्टूबर को राष्ट्रीय प्रदर्शनी व परियोजना प्रतियोगिता (इंस्पायर अवॉर्ड मानक 2023-24) में सम्मानित किया गया है।
प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के कुल पांच विद्यार्थियों ने जीत दर्ज की, जिनमें अभिनंजय पांडेय लखनऊ के एकमात्र विजेता रहे। इसके पीछे मार्गदर्शक शिक्षक उत्कर्ष सिंह का महत्वपूर्ण योगदान है। डालीगंज निवासी अभिनंजय ने बताया कि यह मॉडल उन्होंने 2023 में बनाया था। उस समय वह कक्षा नौ में थे।
बताया कि यह मॉडल तेज गति से चलने वाले वाहनों को नियंत्रित करने में सहायक होगा। नॉन न्यूटोनियन द्रव्य आधारित स्पीड ब्रेकर के अंदर एक विशेष प्रकार का द्रव्य भरा होता है, जिसे नॉन न्यूटोनियन फ्लूइड कहते हैं। यह द्रव्य लगने वाले बल और गति के अनुसार अपना व्यवहार बदलता है।
जब कोई वाहन धीमी गति से इसके ऊपर से गुजरता है, तब द्रव्य तरल की तरह व्यवहार करता है, जिससे झटका नहीं लगता है। इसके उलट जब कोई वाहन तेज गति से गुजरता है तो द्रव्य कठोर होकर ठोस जैसा व्यवहार करता है, जिससे वाहन को झटका महसूस होता है। अभिनंजय की इस उपलब्धि के आधार पर सकुरा हाई स्कूल साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जापान जाने का अवसर भी मिलने की संभावना है।
करीब एक वर्ष तक किया रिसर्च
शिक्षक उत्कर्ष सिंह ने बताया कि अभिनंजय ने इस माडल के लिए करीब एक वर्ष तक रिसर्च किया। इस समय वह इंटरमीडिएट के छात्र हैं और इंजीनियर बनना चाहते हैं। इस माडल का उपयोग बहुत ही सरल है। इसे सड़क पर रखकर दोनों ओर कील की मदद से टिकाया जा सकता है।
जल्द शुरू होगी पेटेंट कराने की प्रक्रिया
लखनऊ मंडल के मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि अभिनंजय ने पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। कई सारे विज्ञानियों ने इनके माडल की उपयोगिता को परखा है। जल्द ही नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की ओर से मॉडल को पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
