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लखनऊ: अस्पतालों के चक्कर काटती रही मां, इलाज के अभाव में चली गई बेटे की जान

Published: Tue, 29 Sep 2026 05:57 AM (IST)

लखनऊ में एक मां अपने 18 वर्षीय बेटे को लेकर सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटती रही, लेकिन बेड और उचित ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. मां ने बेटे को लेकर सरकारी अस्पतालों के कई चक्कर लगाए।

  2. केजीएमयू, ट्रामा सेंटर और बलरामपुर में बेड व उपचार नहीं मिला।

  3. निजी अस्पताल में भर्ती के बाद बेटे की इलाज के दौरान मौत हुई।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मां 18 वर्षीय बेटे को लेकर एक मां सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटती रही, लेकिन बेड नहीं मिला। आरोप है कि केजीएमयू के लारी कार्डियोलाजी, ट्रामा सेंटर और बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में बेड नहीं मिला तो निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवारजन ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है।

लखीमपुर के काशीराम आवास निवासी मोनी गुप्ता का कहना है कि 23 सितंबर को बेटे हिमांशु गुप्ता को सीने में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ थी। जिला अस्पताल से रेफर होकर ट्रामा सेंटर पहुंचे। कई बार अनुरोध के बाद भी किसी डाक्टर ने ठीक से देखा तक नहीं। हार्ट की समस्या बताकर लारी कार्डियोलाजी रेफर कर दिया गया।

लारी की इमरजेंसी पहुंचे तो कई बार अनुरोध के बाद किसी तरह भर्ती कर कुछ जांचें कराई गईं, लेकिन कुछ देर बाद फिर ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। ट्रामा सेंटर में आइसीयू में बेड खाली नहीं होने की बात कहकर दूसरे अस्पताल जाने के लिए बोला गया। किसी तरह स्ट्रेचर पर भर्ती किया गया, पर दो दिन तक कोई इलाज नहीं मिला।

इसके बाद 26 सितंबर को बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इमरजेंसी पहुंचे, तो ईएमओ ने जांच के बाद दोबारा लारी भेज दिया। मोनी ने बताया कि दोनों अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कहीं भी भर्ती नहीं किया और न ही ठीक से उपचार किया गया। ऐसे में एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान हिमांशु की सांसें थम गईं।

परिवारजन की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई है। शिकायत होती है तो इमरजेंसी से इलाज का ब्योरा तलब किया जाएगा। यदि उपचार में लापरवाही हुई है तो ड्यूटी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू

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