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लखनऊ में 70 हजार PNG उपभोक्ताओं का डाटा लीक होने की आशंका, एक लाख लोगों को किया गया अलर्ट

Published: Sat, 12 Sep 2026 10:24 PM (IST)

लखनऊ में पीएनजी उपभोक्ताओं को साइबर ठग बकाया बिल और मीटर अपडेट के बहाने निशाना बना रहे हैं, मोबाइल में ऐप डाउनलोड करवाकर बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

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HighLights

  1. साइबर ठग पीएनजी उपभोक्ताओं को बकाया बिल के नाम पर निशाना बना रहे।

  2. मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड कराकर बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले गए।

  3. लखनऊ में 70 हजार पीएनजी ग्राहकों का डेटा लीक होने की आशंका।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) बिल बकाया और मीटर अपडेट के नाम पर साइबर ठग उपभोक्ताओं को निशाना बना रहे हैं। गैस कंपनी का प्रतिनिधि बनकर पहले फोन या मैसेज करते हैं। कनेक्शन बंद होने का डर दिखाकर मोबाइल में एप डाउनलोड कराते हैं। एप के जरिये उपभोक्ता के बैंक खाते तक पहुंचकर रुपये निकाल लेते हैं।

लखनऊ में ऐसे मामलों में करीब 50 लाख रुपये की ठगी हो चुकी है। अब भी उपभोक्ताओं को ठगों का संदेश पहुंच रहा है। इसी का नतीजा है कि पीएनजी ने राजधानी के अपने करीब एक लाख उपभोक्ताओं को अलर्ट किया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर ठगों तक कैसे पहुंचा? क्या कंपनी के किसी कर्मचारी ने डाटा लीक किया या किसी थर्ड पार्टी के पास डाटा था और वहां से लीक हो गया।

हालांकि, साइबर क्राइम पुलिस डाटा लीक होने की दिशा में जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगों तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है। इस रिपोर्ट में पढ़िए कि ठग कैसे उपभोक्ताओं को ठगते हैं? उनसे कैसे बच सकते हैं?

70 हजार उपभोक्ताओं का डाटा लीक होने की आशंका

पीएनजी के 70 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं का डाटा लीक होने की आशंका सामने आई है। साइबर ठग पीएनजी का नाम और लोगो इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को संदेश भेजते हैं। बकाया बिल और मीटर अपडेट नहीं होने पर रात साढ़े आठ बजे गैस कनेक्शन काटने की चेतावनी देते हैं।

कनेक्शन कटने से बचाने के लिए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने और बिल अपडेट करने को कहते हैं। इसके बाद ठग उपभोक्ताओं को संदिग्ध एपीके (एंड्रायड पैकेज किट) फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं।

जैसे ही उपभोक्ता वह फाइल डाउनलोड करता है, ठगों की पहुंच उसके मोबाइल तक पहुंच जाती है। उसके बाद वह मोबाइल में डाउनलोड यूपीआई, नेट बैंकिग आदि तक पहुंचकर बैंक खाते खाली कर देते हैं।

साइबर क्राइम थाने की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतने बड़े स्तर पर उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर ठगों तक कैसे पहुंचे? कंपनी के भीतर से डाटा लीक होने की आशंका समेत अन्य पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है। -किरन यादव, एडीसीपी क्राइम।

साइबर ठगों से ऐसे बचें

  • गैस कंपनी के नाम से आए अनजान फोन या मैसेज पर भरोसा न करें।
  • मीटर अपडेट के नाम पर भेजे लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।
  • ओटीपी, यूपीआइ पिन, बैंक डिटेल या डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस न दें।
  • बिल और मीटर की जानकारी गैस कंपनी के अधिकृत एप, वेबसाइट या कार्यालय से ही जांचें।
  • ठगी होने पर तत्काल बैंक को सूचना दें और 1930 पर शिकायत करें।
  • संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे हटाएं नहीं। मोबाइल नंबर और पूरे संदेश का स्क्रीनशट सुरक्षित रखें।
  • संदेश को लखनऊ पुलिस की अपराध शाखा की संगठित अपराध हेल्पलाइन 7839861034 पर भेजें।
  • यदि एपीके फाइल डाउनलोड कर ली है तो तुरंत वाई-फाई और मोबाइल इंटरनेट बंद कर दें।
  • बैंक खाते, यूपीआई और अन्य लेनदेन की जांच करें। संदिग्ध लेनदेन मिलने पर बैंक को तुरंत सूचना दें।
  • पैसे की ठगी होने पर तत्काल 1930 पर काल करें और www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
  • साइबर सुरक्षा केंद्र की वेबसाइट www.csk.gov.in से उपलब्ध सुरक्षा उपकरण की मदद से मोबाइल की जांच करें।

अब तक हुईं प्रमुख ठगी

  • विनीतखंड-6 निवासी भरत सिंह से 96,249 रुपये ठगे।
  • एल्डिको एलिगेंस निवासी सुबोध चंद्र अग्रवाल से 31.84 लाख रुपये ठगे।
  • जानकीपुरम विस्तार निवासी राकेश चंद्र श्रीवास्तव से 3.25 लाख रुपये ठगे।
  • कानपुर रोड निवासी पवन कुमार से 6,38,767.64 रुपये ठगे।

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