लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर BJP प्रत्याशी उमेश द्विवेदी जीत के करीब, स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह आगे
लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी जीत के करीब पहुंच गए हैं, जबकि स्नातक सीट पर सपा ...और पढ़ें
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HighLights
लखनऊ शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी जीत के करीब।
स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने बनाई बढ़त।
वरीयता क्रम से स्नातक सीट के परिणाम में बदलाव संभव।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। विधान परिषद की लखनऊ खंड शिक्षक की मतगणना के दूसरे और अंतिम राउंड में भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी जीत के करीब पहुंच गए। इसे पूर्व भी पहले राउंड में उमेश द्विवेदी आगे चल रहे थे। पहले राउंड के जारी परिणाम में उन्हें उमेश द्विवेदी को 7189 मत मिले, जबकि दूसरे स्थान पर सपा के सुशील कुमार रहे।
सुशील को 3537 मत मिले थे। पहले राउंड में सुशील कुमार ही उमेश द्विवेदी के निकटतम प्रतिद्वंदी रहे। वहीं लखनऊ खंड स्नातक की मतगणना के पहले राउंड में देर में रात एक बजे तक सपा प्रत्याशी कांति सिंह भाजपा प्रत्याशी ई अविनीश सिंह से करीब दो हज़ार मतो के अंतर से आगे चल रही थी।
बता दें कि मंगलवार को विधान परिषद की लखनऊ खंड शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों के लिए रमाबाई रैली स्थल पर सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू होनी थी, लेकिन दिनभर मतपत्रों के बंडल बनाने की प्रक्रिया ही चलती रही। शाम छह बजे मतों की गिनती शुरू हो सकी।
इस बीच स्नातक सीट के लिए सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि बंडलों में अधिक मतपत्र मिले हैं। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी अभय किशोर का कहना है कि पूरी पारदर्शिता से मतगणना का काम हो रहा है। उनके अनुसार लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतपत्रों के बंडल बनाए जाने का काम शाम छह बजे पूरा हो पाया। छह बजे से प्रथम चक्र के तहत अभ्यर्थीवार मतों की गणना शुरू हो गई है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दो चक्रों में गणना होनी है, जबकि लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र के लिए मतपत्रों के बंडल बनाए जाने का काम चल रहा था। शिक्षक सीट पर 13 और स्नातक सीट पर 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। मतगणना के लिए रैली स्थल के दोनों हाल में 14-14 टेबल लगाई गई हैं।
स्नातक सीट पर वरीयता क्रम से बदलेगा मतों का गणित
विधान परिषद की लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन सीट पर मतगणना में सिर्फ पहली गिनती के आंकड़े निर्णायक नहीं होंगे। मतपत्रों पर दर्ज वरीयता क्रम जीत और हार का समीकरण बदल सकता है। ऐसे में शुरुआती दौर में बढ़त बनाने वाला प्रत्याशी अंतिम परिणाम में पिछड़ भी सकता है। जीत के लिए निर्धारित मतों का कोटा हासिल करना जरूरी होगा। स्नातक निर्वाचन में मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशियों के सामने पहली, दूसरी और आगे की वरीयता अंकित करते हैं।
यदि पहली गिनती में कोई प्रत्याशी जीत के लिए जरूरी कोटा हासिल नहीं कर पाता है तो सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है। इसके बाद उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वैध वरीयता के आधार पर मत दूसरे प्रत्याशियों को हस्तांतरित किए जाते हैं।
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मतों के हस्तांतरण की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। हर चरण में प्रत्याशियों के मतों का अंतर बदलने की संभावना रहती है। इसलिए शुरुआती बढ़त को जीत का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। अंतिम नतीजे तक पहुंचने के लिए सभी जरूरी चरणों की गिनती पूरी करनी होगी।
