बाढ़ की मार से लखनऊ बेहाल, महापौर सुषमा खर्कवाल ने सरकार से मांगी वित्तीय मदद; तैयार किया 7603 करोड़ का बजट
महापौर सुषमा खर्कवाल ने लखनऊ के बाढ़ प्रभावित और विस्तारित क्षेत्रों के लिए सरकार से 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है।

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HighLights
महापौर ने बाढ़ प्रभावित लखनऊ के लिए वित्तीय मदद मांगी।
7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया।
वित्त आयोग से जनसंख्या के बजाय क्षेत्रफल को आधार बनाने का आग्रह।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। शहर में बाढ़ प्रभावित इलाकों में पटरी से उतरी व्यवस्था को सुधारने के लिए महापौर सुषमा खर्कवाल ने सरकार से मदद मांगी है। शहरी चुनौतियों के समाधान को लेकर गोमतीनगर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में महापौर ने कहा कि वर्तमान समय में नगर निगम से जुड़े क्षेत्रों में बाढ़ है और सब कुछ बर्बाद हो गया है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में उन्होंने छठे राज्य वित्त आयोग से आग्रह किया कि नगर निकायों को वित्तीय सहायता देने का आधार केवल जनसंख्या तक सीमित न रखा जाए, बल्कि क्षेत्रफल, विस्तार, आधारभूत सुविधाओं की कमी और वास्तविक जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा जाए।
नगर निगम का क्षेत्रफल 310 से बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर हो गया। नए क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना होगा। नगर निगम के विस्तारित क्षेत्रों और गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित इलाकों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना होगा।
बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी
उनकी बातों को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार, आयोग के सदस्यों ने सुना। महापौर ने कहा कि नए क्षेत्रों में सड़क, नाली, जलनिकासी, प्रकाश, स्वच्छता, पार्क, पेयजल और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नगर निगम की सीमा में किसी क्षेत्र को शामिल तो कर दिया गया है लेकिन वहां रहने वाले नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
विस्तारित क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 7,603 करोड़ की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है। महापौर ने छठे राज्य वित्त आयोग के समक्ष नगर निगम की वित्तीय आवश्यकताओं को लेकर पांच प्रमुख अपेक्षाएं भी रखीं।
इसमें नगर निगम का निर्धारित वित्तीय अंश दोगुना करना, पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या और क्षेत्रफल में हुई वृद्धि को देखते हुए पूर्व आयोग द्वारा निर्धारित वित्तीय अंश को दोगुना करना, विकास और मार्ग प्रकाश के लिए 2,184 करोड़ दिए जाएं। पेयजल और सीवर सुविधाओं के लिए 5,825.85 करोड़ दिया जाए।
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स्टाम्प ड्यूटी की दो प्रतिशत की पूरी राशि नगर निगम को ही मिले। महापौर ने कहा कि यूपी सीडा की संपत्तियों को कर के दायरे से बाहर रखने और कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के कर निर्धारण में छूट दिए जाने से नगर निगम के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का विषय उठाया। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाओं से होने वाली राजस्व हानि की उचित भरपाई किए जाने का आग्रह किया।
