लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटरों का जाल, अहमदाबाद से जुड़े तार, पुलिस की बड़ी कार्रवाई में खुला राज
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ हुआ है, जो रात-दिन खुले रहने वाले व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे थे।

लखनऊ में गुरुवार को कपूरथला पुलिस चौकी के पास चल रहे कॉल सेंटर में छापे के दौरान आरोपियों को हिरासत में लेकर जाते पुलिसकर्मी। जागरण
HighLights
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटरों का बड़ा भंडाफोड़ हुआ।
अलीगंज और विभूति खंड में कई कॉल सेंटर पकड़े गए।
साइबर ठगी नेटवर्क के अहमदाबाद से जुड़े तार उजागर हुए।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। फर्जी कॉल सेंटर संचालक ऐसी व्यावसायिक इमारतें चुनते हैं, जो रात-दिन खुले। परिसर में अलग-अलग प्रतिष्ठान चलते हों। युवक-युवतियों की आवाजाही अधिक हो। इससे उन्हें आने-जाने और रात में ठगी का कॉल सेंटर चलाने में आसानी होती है। पुलिस का भी इनकी ओर कम ध्यान जाता है।
जल्दी पकड़ में नहीं आते हैं। विभूति खंड के समिट बिल्डिंग में चल रहे इंटरनेशनल फर्जी कॉल सेंटर का डेढ़ वर्ष और अलीगंज के रिध्या पैलेस में चार माह बाद पता चलने से इसकी पुष्टि भी हो रही है, क्योंकि ये दोनों कॉल सेंटर पुलिस की नाक के नीचे चल रहे थे। समिट बिल्डिंग में ही पुलिस चौकी है और रिध्या पैलेस से 20 कदम पर कपूरथला पुलिस चौकी है।
लगातार लोगों की आवाजाही से नहीं आए शक के दायरे में
अलीगंज में पकड़ा गया ठगी का कॉल सेंटर कपूरथला पुलिस चौकी के सामने रिध्या पैलेस में चार माह पहले किराए के कार्यालय में खुला। इस बिल्डिंग का भूतल अभी खाली है। प्रथम तल पर कॉल सेंटर चल रहा था। दूसरे तल पर आनलाइन गिफ्टिंग और डिलीवरी प्लेटफार्म का सेंटर है। उसके ऊपर जिम है।
इस वजह से तड़के से आधी रात तक बिल्डिंग में लोगों की आवाजाही रहती थी। विभूति खंड की जिस समिट बिल्डिंग में एक जुलाई को इंटरनेशनल ठगी के सेंटर का राजफाश हुआ था। उसमें तमाम बार और कार्यालय हैं। बिल्डिंग में 24 घंटे कार्यालय खुलते हैं। लोगों की आवाजाही रहती है।
लखनऊ में पकड़े गए प्रमुख फर्जी कॉल सेंटर
- 15 जून को आरएस टावर, विभूति खंड में फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटर पकड़ा गया। पांच आरोपित गिरफ्तार हुए।
- 28 जून को विभूति खंड में फर्जी जॉब कॉल सेंटर पकड़ा गया। तीन आरोपित गिरफ्तार हुए।
- 1 जुलाई को विभूति खंड की समिट बिल्डिंग में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया। 119 आरोपित गिरफ्तार हुए।
- 17 जुलाई को ओमैक्स आर-दो में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया। सात आरोपित गिरफ्तार हुए।
- 23 जुलाई को साइबर हाइट्स, विभूतिखंड के फ्लैट 420-ए फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया। 4 आरोपित गिरफ्तार हुए।
अहमदाबाद से लखनऊ तक फैला नेटवर्क
विभूतिखंड की समिट बिल्डिंग, सुशांत गोल्फ सिटी के ओमेक्स आरटू के बाद अब अलीगंज में पकड़े गए कॉल सेंटर ने साइबर ठगी के नेटवर्क के अहमदाबाद कनेक्शन को फिर सामने ला दिया है। तीनों जगहों पर अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी मदद और साफ्टवेयर सेवा के नाम पर फंसाने का तरीका लगभग एक जैसा मिला है।
अलीगंज के कॉल सेंटर में पकड़े गए दो मैनेजर नेहल सिद्पुरा और मनसुख भाई पटेरिया अहमदाबाद के रहने वाले हैं। दोनों नए युवकों को नौकरी पर रखने के साथ उन्हें ठगी की ट्रेनिंग भी देते थे। यही नहीं अहमदाबाद के रहने वाले श्रीकुशवाहा प्रियांशु उर्फ शिव के नाम पर किराए पर जगह ली गई थी।
पैटर्न की कड़ियां जुड़ने की आशंका
समिट बिल्डिंग में सामने आए नेटवर्क से भी इस पैटर्न की कड़ियां जुड़ने की आशंका है। पुलिस अब तक वहां के मुख्य आरोपित चार्ल्स तक नहीं पहुंच सकी है। जांच में यह भी सामने आया था कि अलग-अलग स्थानों पर छोटे-छोटे कॉल सेंटर बनाकर काम कराया जा रहा था।
अलीगंज की कार्रवाई के बाद इन केंद्रों के बीच संपर्क और डाटा की आपूर्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पकड़े गए अधिकांश आरोपित पश्चिम बंगाल और गुजरात के रहने वाले हैं। पुलिस अब अहमदाबाद से जुड़े संचालक और समिट बिल्डिंग के नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
चार युवतियों समेत 16 लोग पकड़े
अलीगंज में कपूरथला चौराहे के पास चार महीने से कॉल सेंटर चल रहा था। छापेमारी में चार युवतियों समेत 16 लोग पकड़े गए। मौके से मोबाइल, लैपटाप और कंप्यूटर बरामद हुए। पूछताछ में सामने आया कि आरोपित अमेरिकी नागरिकों के लिए फर्जी तकनीकी सहायता नंबर चलाते थे। ग्राहक मदद के लिए फोन करता तो उसकी कॉल इंटरनेट के जरिये कॉल सेंटर में पहुंचती।
पुलिस के अनुसार, अलीगंज में पकड़े गए लोगों का काम अमेरिकी नागरिकों की जानकारी जुटाकर दूसरी टीम को उपलब्ध कराना था। इसके बाद दूसरी टीम रकम निकलवाने का काम करती थी। यानी ठगी का पूरा काम एक ही जगह से नहीं बल्कि अलग-अलग टीमों में बांटा गया था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि दूसरी टीम कहां बैठकर काम करती थी और ठगी की रकम किस माध्यम से आरोपितों तक पहुंचती थी।
